बहुजन समाज पार्टी के पश्चिमी दिल्ली के उम्मीदवार राजपाल प्रजापति ने पार्टी के टिकट पर नामांकन दाखिल करने के लिए दल-बदल कर दिया। ऐसे में उस संसदीय क्षेत्र में न केवल पार्टी की उम्मीदवारी समाप्त हो गई, बल्कि उस क्षेत्र में पार्टी समर्थक वोटरों के सामने भी एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि वोट किसे दें?
दरअसल नामांकन भरने और चुनाव आयोग से उसपर मुहर लगने के बाद उम्मीदवारी वापस नहीं ली जा सकती। न ही पार्टी कोई दूसरा उम्मीदवार खड़ा कर सकती है। ऐसे में अगर कोई समर्थक पार्टी को वोट करता है तो वह उसी भगोड़े प्रत्याशी के खाते में जाएगा, जिसने ऐन मौके पर पार्टी को धोखा दिया है।
वोटर अपने मन से कभी उस भगोड़े प्रत्याशी को वोट नहीं देना चाहेगा। लेकिन ताज्जुब की बात ये है कि खुद बसपा लोगों से यह अपील कर रही है कि उसे वोट करें। ऐसे में अगर बसपा उस क्षेत्र में जीत दर्ज करती है, तो वह भगोड़ा प्रत्याशी ही जीतेगा।
गुस्से में कर रहे हैं प्रचार
दरअसल, लोकसभा पश्चिम दिल्ली संसदीय सीट से चुनावी जंग छोड़कर भागे बसपा प्रत्याशी राजपाल प्रजापति ने कांग्रेस ज्वाइन कर ली है। इसलिए अब हाथी चुनाव चिन्ह पर वही चुनाव लड़ेगे। हाथी को मिलने वाले वोट भी उन्हीं के खाते में जाएंगे।
लेकिन उनके दल-बदलने से नाराज हुए पार्टी कार्यकर्ताओं ने क्षेत्र में प्रचार-प्रसार बंद करने की बजाए और तेज कर दिया है। चुनाव से ऐन पहले प्रत्याशी के दल बदलने से हाथी के समर्थक गुस्से में तो हैं, लेकिन उसी प्रत्याशी का प्रचार किए जा रहे हैं।
जबकि क्षेत्र के मतदाताओं में भी उम्मीदवार को लेकर काफी गुस्सा है। लेकिन यह बात समझ से परे है कि इस गुस्से में भी वह कैसे उसी को वोट देंगे। जबकि बसपा कार्यकर्ताओं का मानना है कि हाथी जग में अपनी ताकत दिखा कर रहेगा, भले ही वोट प्रत्याशी के खाते में ही शामिल क्यों न हो।
बड़े-बड़ों का गणित फेल
दरअसल इन दिनों राजनीति कुछ यूं करवट खा रही है कि बड़े-बड़े तीस मार खां गच्चा खा जा रहे हैं। खुद अपने ही प्रत्याशी ऐसे वक्त पर पल्टी मार जा रहे हैं जब पार्टी सिवाय अपने फैसले पर छला हुआ महसूस करने के और कुछ नहीं कर पा रही है।
जिस तरह से रमेश चंद तोमर गौतमबुद्ध नगर में कांग्रेस का हाथ छोड़कर बीजेपी के साथ जुड़ गए, ठीक उसी तरह राजपाल प्रजापति बसपा छोड़कर कांग्रेस के पाले में आ गए।
सूत्रों का कहना है नेताओं ने तय किया है कि पश्चिमी दिल्ली सीट पर अब अकेला हाथी ही चुनाव लड़ेगा। प्रजापति को हाथी की ताकत का एहसास कराने के मकसद से ही बृहस्पतिवार को एक नई टीम तैयार की गई है।
मायावती भी करेंगी रैली
सूत्रों का कहना है कि क्षेत्र में पार्टी के प्रचार-प्रसार का जिम्मा उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री विधायक महेंद्र चौधरी, दिल्ली के प्रदेश प्रभारी एमएल तोमर और जिला स्तर के वरिष्ठ नेताओं को सौंपा गया है। इनके नेतृत्व में क्षेत्र में जमकर प्रचार किया जा रहा है।
गत लोकसभा चुनाव में उत्तर-पूर्व संसदीय क्षेत्र से हाजी दिलशाद मतदान की तारीख से कुछ दिन पहले ही चुनाव मैदान से हट गए थे और हाथी चुनाव लड़ा था। यही स्थिति इस बार पश्चिमी दिल्ली में होने पर बड़े नेता बेहद खफा हैं, लेकिन उन्हें इस बात का यकीन है कि उनका वोट बैंक प्रतिशत प्रजापति के हटने के कम नहीं होगा।
गौरतलब है कि सात अप्रैल को बसपा सुप्रीमो मायावती की रैली की तैयारियां चल रही हैं, जिसमें पांच लाख लोगों के आने की उम्मीद जताई जा रही है।