जन आरोग्य योजना को रविवार को प्रधानमंत्री झारखंड राज्य से शुरू करेंगे। लेकिन इससे पहले ही यह योजना धंधेबाजों के चंगुल में फंस गई है। गूगल प्ले और वॉट्सएप के जरिए धंधेबाज लिंक वायरल कर हजार रुपये का शुल्क चुकाकर इस योजना में पंजीयन कराने का झांसा दे रहे हैं। जबकि यह योजना केंद्र सरकार की ओर से निशुल्क है।
नीति आयोग तक पहुंची इन शिकायतों के बाद स्वास्थ्य मंत्रालय के माथे पर बल पड़ गए हैं। सरकार की आईटी सेल ने इसकी जांच शुरू कर दी है। सूत्रों की मानें तो जल्द ही सरकार जन आरोग्य को लेकर फर्जीवाड़ा कर रहे इन मोबाइल एप और सोशल साइट को बंद करने का आदेश दे सकती है।
दरअसल, मोदी सरकार ने 15 अगस्त को इसका नाम बदलकर प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना रख दिया है। इस योजना के तहत 11 करोड़ परिवार के करीब 55 करोड़ से ज्यादा लोगों को स्वास्थ्य बीमा देने के लिए पंजीकृत करना है। इसलिए सरकार ने जिला स्तर पर निशुल्क पंजीयन मुहिम शुरू की थी। बावजूद इसके सोशल साइट पर इसे कमाई का जरिया बनाया जा रहा है।