घर के मुखिया की मौत से इकलाख का परिवार टूट गया है। पीड़ित परिजन दो दिन बाद भी वे भयावह पल नहीं भूल पा रहे हैं। इकलाख की मां, पत्नी और बेटी को दिलासा देने के लिए रिश्तेदार तो पहुंच रहे हैं लेकिन घटना के बाद से वे गांव में खुद को अकेला महसूस कर रहे हैं।
इकलाख की मां असगरी (85) रोकर बार-बार यहीं कह रही थीं कि अब तो गांव में रहने का कोई कारण ही नहीं बचा। बच्चों की जान बचाने के लिए गांव छोड़ना ही पड़ेगा। उन्होंने बताया कि उन्हें इस गांव में 70 साल हो गए हैं। उन्होंने कभी खुद को गांव वालों से अलग समझा ही नहीं। हर घर में उनका आना-जाना था।
गांव के हर परिवार के लोग उनके घर आते-जाते थे। मगर सोमवार की रात तो काली ही हो गई। रात में गांव के लोगों ने उनके बेटे और पोते को पीट-पीटकर अधमरा कर दिया था।