खुद की जान की परवाह किए बिना दूसरों की जान बचाने वाले बच्चों को सलाम। राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार के लिए चुने गए 24 बच्चों में से चार बच्चों ने दूसरों की जान बचाने के लिए अपनी जान गंवा दी।
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नोएडा के सेक्टर-38 ए स्थित वर्ल्ड्स ऑफ वंडर में रविवार को बहादुर बच्चों को सम्मानित किया गया। इस मौके पर बहादुर बच्चों ने जमकर झूले का लुत्फ उठाया। कार्यक्रम में बच्चों की बहादुरी को याद कर उनके परिजनों की आंखें नम हो गईं।
11 मार्च 2014 को 16 वर्षीय गौरव कुमार भारती ने अपने दोस्त विकास को नदी में डूबने से बचाया था। इसमें गौरव की जान चली गई थी। उत्तर प्रदेश के देवरिया निवासी यूपी पुलिस में तैनात गौरव के पिता शंभूनाथ भारती और मां अनीता देवी ने कहा कि हमारे बेटे का साहस सेना के किसी जवान से कम नहीं था। हमें उस पर गर्व है। यह कहते हुए उनकी आंखें भर आईं।
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15 जून 2014 को उत्तराखंड के बालेश्वर निवासी 17 साल की मोनिका उर्फ मनीषा एक बच्ची को बचाने के लिए नदी में कूद गई थी। मोनिका ने बच्ची को तो बचा लिया, लेकिन वह खुद नहीं निकल पाई। उसके चाचा हरीश ने बताया कि मोनिका के पिता चंद्र मोहन अशक्त हैं। मां कमला देवी बीमार रहती हैं। बच्ची की याद कर उनकी आंखें भर आती हैं। बच्ची का साहस उन्हें हौसला देता है।
प्रशासन से शिकायत
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर निवासी 18 वर्षीय रिया चौधरी ने 10 मार्च 2014 को गुंडों से लोहा लिया था। परिजनों पर चली गोली को वह खुद झेल गई थी। रिया की मां को भी गोली लगी थी। मां तो बच गई, लेकिन रिया की जान चली गई। पिता सुरेश पाल ने कहा कि अब भी परिवार को धमकी मिल रही है, लेकिन प्रशासन परिवार को सुरक्षा मुहैया नहीं करा रहा है।
यादों में जीवित है मेसक 14 वर्षीय मेसक एक बच्चे को बचाने के लिए नदी में कूद गया था। बच्चे को उसने बचा लिया, लेकिन खुद डूब गया। मेसक के परिजन सांगमनी ने बताया कि मेसक बहादुर होने के साथ पढ़ाई में भी बहुत अव्वल था। वह अब इस दुनिया में भले ही नहीं है, लेकिन यादों में जीवित है।
नन्हीं रीपा ने दिखाया बड़ा साहस त्रिपुरा निवासी सात वर्षीय नन्हीं रीपा दास ने 24 अप्रैल 2014 को आग में फंसे अपने एक साल के भाई को सुरक्षित निकाला था। रविवार को रीपा ने सभी बच्चों के साथ वर्ल्ड्स ऑफ वंडर में डांस भी किया।