ट्यूमर निकालने के लिए बनाई एक टीम
उक्त सर्जरी के बाद ट्यूमर का कुछ हिस्सा सिर में रह गया था जिसे निकालना जरूरी था। बच्ची की हालत को देखते हुए एम्स के न्यूरो सर्जरी विभाग के प्रोफेसर डॉ। दीपक गुप्ता, एनेस्थीसिया विभाग के डॉ। मिहिर पांड्या सहित सात डॉक्टरों की एक टीम बनी। टीम ने पूरे मामले को लेकर रणनीति तैयार की और निर्णय लिया कि बच्ची को बिना बेहोश किए सर्जरी की जाएगी। यह चुनौती भरा निर्णय था।
चार घंटे चली सर्जरी
डॉ. मिहिर पांड्या बताते हैं कि चार जनवरी को सात डॉक्टरों के साथ अन्य स्टाफ को भी इस सर्जरी में शामिल किया गया। टीम के कुछ सदस्यों ने बच्ची की निगरानी की। जबकि अन्य सदस्यों से सर्जरी शुरू करी। सबसे पहले बच्ची की खोपड़ी में 16 इंजेक्शन लगाए गए। उसके बाद निरीक्षण किया गया। जब उसका सिर पूरी तरह से सुन हो गया तो डॉक्टरों ने सर्जरी शुरू करी। करीब चार घंटे तक चली सर्जरी के बाद बच्ची के सिर से पूरी तरह से ट्यूमर निकाला जा सका। पूरी सर्जरी के दौरान बच्ची मुस्कुरा रही थी। उसे कई बार फोन में वीडियो और फोटो भी दिखाए गए। उसने डॉक्टरों के कहने पर अपनी प्रतिक्रिया भी दी। सर्जरी के बाद बच्ची पूरी तरह से ठीक है और जल्द ही उसे छुट्टी भी दी जा सकती है।
बच्ची को था यह ट्यूमर
बच्ची को लेफ्ट पेरिसिल्वियन इंट्राक्सियल ब्रेन ट्यूमर था। डॉक्टरों का कहना है कि यह किसी को भी हो सकता है। ब्रेन ट्यूमर होने पर सिर में दर्द, उल्टी आना, चलने, हाथ उठाने में दिक्कत होना, दौरा पड़ना जैसे लक्षण दिखते हैं। यदि किसी में ऐसा होता है तो तुरंत डॉक्टरों से संपर्क करना चाहिए। इस मामले में भी बच्ची में यह सभी लक्षण दिखे थे। लक्षण दिखने के बाद जांच करवाई गई। करीब दो साल पहले ट्यूमर को हटाने के लिए एक सर्जरी भी हुई।
चुनौती भरा था मामला
डॉक्टरों का कहना है कि काफी कम उम्र की बच्ची के सिर की सर्जरी काफी चुनौती भरा मामला रहा। इस मामले में एक छोटी सी गलती बच्ची की जान ले सकती थी। यहीं कारण है कि सर्जरी के दौरान डॉक्टरों की टीम ने एक मिनट की निगरानी की। सर्जरी के हर पल पर उसके शरीर में होने वाले बदलाव व हरकत पर नजर रखी गई। इस सर्जरी में यह अच्छा रहा कि इस दौरान कभी भी ऐसा नहीं हुआ जब बच्ची के व्यवहार में कोई बदलाव दिखा हो।