सरकारी स्कूलों में लड़के-लड़कियां अलग-अलग पढ़कर ही बेहतर प्रदर्शन करते हैं। इस मिथक को दिल्ली के सह-शिक्षा स्कूलों ने झुठला दिया है। चौंकाने वाली बात यह है कि ऐसे स्कूलों में इस बार 10वीं का रिजल्ट काफी बेहतर रहा है।
10वीं के नतीजों में इस बार सामने आए इस ट्रेंड ने सह शिक्षा स्कूलों को खोले जाने के विषय में सोचने पर मजबूर कर दिया। सरकार भी इस विषय में विश्लेषण कर सह-शिक्षा स्कूल बनाने पर विचार कर रही है।
शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने बताया कि स्कूली शिक्षा में दो महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिले हैं, जिनमें सेे एक सह-शिक्षा विद्यालयों का प्रदर्शन व दूसरा गणित में लड़कियों का बेहतर प्रदर्शन है। सह-शिक्षा वाले विद्यालयों का पास प्रतिशत 88.1 फीसदी व लड़कियों के स्कूलों का पास प्रतिशत 82 फीसदी है, जबकि लड़कों का 74.8 फीसदी रहा है।
सरकार के यह आंकड़े साबित करते हैं कि लड़के व लड़कियों अलग-अलग पढ़ाने की सोच में बदलाव की जरूरत है। सह-शिक्षा विद्यालयों में लड़के-लड़कियों को एक-दूसरे से काफी कुछ सीखने का अवसर मिला है। मालूम हो कि अधिकतर निजी स्कूलों में सह-शिक्षा दी जाती है, जबकि सरकारी स्कूलों में कुछ ही सह-शिक्षा विद्यालय हैं।
सरकारी स्कूलों में लड़कों के लिए ईवनिंग शिफ्ट व लड़कियों के लिए मॉर्निंग शिफ्ट में अधिकतर स्कूल चलते हैं। हर रिजल्ट में देखा जाता है कि लड़कियों का प्रदर्शन लड़कों के मुकाबले में बेहतर रहता है।
खासकर गणित के लिए माना जाता है कि लड़कियां गणित में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सकती, लेकिन इस बार के प्रदर्शन ने इस मिथ को भी गलत साबित किया है। गणित में लड़कियों का पास प्रतिशत 83.92 फीसदी रहा है जबकि लड़कों का पास प्रतिशत 78.78 फीसदी रहा।