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माता-पिता को नहीं मिलवा पाया तो लगा ली फांसी

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दिल्ली का स्वर्णिम उर्फ शानू हर कीमत पर अपने माता-पिता को मिलाना चाहता था। दोनों बच्चों ने अपने स्तर बहुत कोशिश भी की।
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कोई रास्ता न दिखा तो मासूम शानू ने मौत को गले लगाने का फैसला किया। शानू ने अपनी मौत का दिन भी ऐसा चुना कि सब हक्के-बक्के रह गए। 1 सितंबर को शानू का बर्थडे था।

बर्थडे से ठीक पहले सोमवार की रात 12:00 बजे उसने अपने भाई शिखर व मौसेरी बहन के साथ बर्थडे मनाया था। शानू के पिता विनोद ने रोते हुए बताया कि वर्ष 1996 में उसकी रीतू सिंह से शादी हुई थी।
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रीतू के पिता धर्मपाल सिंह बीएसएनएल में स्टेट ऑफिसर थे। रीतू ज्यादा पढ़ी लिखी नहीं थी। विनोद ने अपनी पत्नी को ग्रेजुएशन, पोस्ट ग्रेजुएशन कराया।

आईटी का अच्छा जानकार व डांसर भी था शानू

बाद में उसे प्रोफेशनल कोर्स कराया। रीतू को कमाने की धुन थी। छोटी-छोटी बातों पर दोनों के बीच कलह होने लगी। कोर्ट के आदेश के बाद शानू व शिखर को मां को सौंपकर उनका गार्जियन नाना-नानी को बना दिया गया।

वर्ष 2012 में बच्चों को छोड़कर रीतू दुबई चली गई। बच्चे नाना-नानी के पास अकेले रह गए। माता-पिता के जुदाई की वजह से बच्चे अकेलेपन का शिकार हो गए।

इस अकेलेपन का जिक्र शानू ने अपने वॉट्सएप स्टेट्स पर भी किया है। विनोद के मुताबिक इसी डिप्रेशन में शानू ने फांसी लगा ली। बकौल विनोद शानू पढ़ने में अच्छा तो था ही साथ ही आईटी का अच्छा जानकार व अच्छा डांसर भी था।
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अब नहीं खोना है दूसरा बेटा

बेटे की मौत के बाद अब विनोद और रीतू एक साथ रहने के लिए तैयार हो गए हैं। उनका कहना है कि एक बेटा तो उन्होंने खो दिया है, लेकिन वह दूसरे बेटे को नहीं खोना चाहते हैं।

विनोद ने बताया कि मामूली झगड़ों के बाद मामला कोर्ट पहुंचा। अब दोनों ने साथ रहने का फैसला किया है। दोनों पति-पत्नी ने अलग रहना शुरू कर दिया। लेकिन इसके बाद भी उसने रीतू से तलाक नहीं लिया।

दोनों बच्चों के लिए एक दूसरे से मिलते थे। अलग-अलग रहते थे। कोर्ट ने आदेश दिया था कि बच्चे जब तक बालिग नहीं हो जाते वह अपनी मां के साथ रहेंगे। अब शानू की मौत के बाद विनोद व रीतू ने एक साथ रहने का फैसला किया है।
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