उत्तर-पूर्वी जिला पुलिस उपायुक्त डॉ. अजीत कुमार सिंगला ने बताया कि गली नंबर-1, ज्योति नगर निवासी अब्दुल खालिक के 10 वर्षीय बेटे अब्दुल हन्नान को सोमवार शाम को किसी ने अगवा कर लिया।
खालिक मूलरूप से मुजरिया, बदायूं का रहने वाला है। वारदात के समय हन्नान अपने भाई-बहनों के साथ ट्यूशन पढ़ने जा रहा था। खालिक की ज्योति नगर में तीन प्रिंटिंग प्रेस हैं।
इधर, बदमाशों ने खालिक के मोबाइल पर एक करोड़ रुपये की फिरौती के लिए कॉल कर दी। खालिक ने मामले की सूचना पुलिस को दी।
उपायुक्त डॉ. अजीत सिंगला, अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त आरपी मीना, अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त-2, संदीप बयाला, एसीपी नंद नगरी सुबोध गोस्वामी, अन्य एसीपी व इंस्पेक्टर समेत 70 लोगों की टीम ने छानबीन शुरू कर दी।
छानबीन के दौरान पता चला कि बदमाशों ने फिरौती की कॉल पानीपत के एक पीसीओ से की। पुलिस ने मासूम के पिता अब्दुल खालिक से बातचीत जारी रखने के लिए कहा।
पुलिस के कहने पर फिरौती की रकम की सौदेबाजी होने लगी। एक करोड़ से 50 लाख और फिर 20 लाख में सौदा हुआ। इधर, आरोपी दिल्ली पहुंच गए। वह दिल्ली के अलग-अलग स्थानों से कॉल करने लगे।
बदमाशों ने फिरौती के लिए आठ कॉल कीं। इसी दौरान गांधी नगर स्थित कैलाश नगर में बदमाशों की लोकेशन मिली। एएटीएस इंस्पेक्टर विनय यादव व स्पेशल स्टाफ की टीम ने कैलाश नगर के आसपास निगरानी शुरू कर दी।
इसी दौरान पुलिस ने दो युवकों को एक बच्चे के साथ पार्क में घूमते हुए देखा। पुलिसकर्मियों ने हन्नान की पहचान कर ली। फौरन दोनों आरोपियों तारिक और दानिश को दबोचकर बच्चे को सकुशल मुक्त करा लिया गया।
तारिक और दानिश ने खुलासा किया कि उन्होंने पीड़ित अब्दुल खालिक के भांजे मोहसिन के कहने पर ही हन्नान को अगवा किया था। तारिक ने कुछ समय मोहसिन के पास काम किया था।
तारिक को 10 हजार रुपये की जरूरत थी। मोहसिन ने उसका फायदा उठाते हुए तारिक को हन्नान को अगवा करने का जिम्मा सौंपा। आरोपी तारिक ने अपने दोस्त दानिश को साजिश में शामिल कर लिया। मोहसिन ने हन्नान के आने-जाने का समय बताया।
उसके बाद तारिक व दानिश ने पता पूछने के बहाने मासूम को अगवा कर लिया। बाद में वह उसे बस से पानीपत ले गए। रातभर वहां रुकने के बाद वह उसे मंगलवार को दिल्ली ले आए। पुलिस मोहसिन की तलाश कर रही है।