उदयपुर की राजकुमारी 'कृष्णा' के बलिदान की कहानी से हम सभी अवगत हैं। लेकिन पहली बार मेवाड़ की पृष्ठभूमि वाली इस बालिदान कहानी को उपन्यास 'सौंदर्य का बलिदान' के रूप में प्रस्तुत किया गया है। यह साहसिक काम खुर्जा के डॉ. केशव कल्पांत ने किया है।
नोएडा 56 में केशव कल्पांत के उपान्यस का दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर ने विमोचन किया गया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि केशव कल्पांत ने मेवाड़ की पृष्ठभूमि को बेहतरीन ढंग से उपन्यास की सीमाओं में बांधा है।
उन्होंने उदयपुर की राजकुमारी की कथा को नये सिरे से उकेरा है। इसी मौके पर केशव कल्पांत ने अपनी कविताओं का पाठ भी किया।
केशव कल्पांत की पहले भी दो रचनाएं 'माटी की गाड़ी, अर्थशाला' प्रकाशित हो चुकी हैं। नोएडा में हुए विमोचन समारोह में केसी शर्मा, आरपी सिंह, उमाशंकर माथुर, नहेरा, चावा, नवीन गुप्ता, राखी गुप्ता, साधना गुप्ता, सीमा गुप्ता आदि मौजूद रहे।