एक-दूसरे के खून के प्यासे नीरज बवाना व नीतू दाबोदा गिरोह एक समय में एक ही गिरोह हुआ करता था। गिरोह के एक सदस्य की हत्या के बाद दोनों अलग हो गए।
इसके बाद मौका लगने पर एक-दूसरे गिरोह के सदस्यों की जान ले रहे हैं। पुलिस की मानें तो गैंगवार में एक दर्जन से ज्यादा जानें जा चुकी हैं।
स्पेशल सेल के एक अधिकारी ने बताया कि वर्ष 2012 की शुरुआत नीतू दाबोदा और नीरज बवाना एक ही गिरोह हुआ करता था। गिरोह का सरगना नीतू दाबोदा था। अप्रैल 2012 में नीतू दाबोदा ने गिरोह के सदस्य सोनू की हत्या कर दी थी।