दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने जदयू के पूर्व नेता साबिर अली मानहानि मामले में भाजपा उपाध्यक्ष मुख्तार अब्बास नकवी को जमानत प्रदान कर दी।
साबिर अली ने अपना संबंध इंडियन मुजाहिदीन के गिरफ्तार सह-संस्थापक यासिन भटकल के साथ कथित तौर पर जोड़े जाने पर नकवी के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया है।
पटियाला हाउस स्थित मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट आकाश जैन ने बुधवार को नकवी की जमानत दस हजार रुपये के निजी मुचलके पर स्वीकार की है।
पेश नहीं होने पर साबिर अली को फटकार
अदालत ने सुनवाई के दौरान साबिर अली के पेश न होने पर नाराजगी जताई है। अदालत ने चेतावनी दी है कि यदि अली, 16 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई के दौरान पेश नहीं हुए तो याचिका रद्द कर दी जाएगी।
इससे पूर्व अदालत के समक्ष पेश नकवी के वकील अजय दिग्पाल ने नकवी की ओर से जमानत आवेदन दायर कर तर्क रखा कि जिस आरोप में उनके मुवक्किल को समन जारी किया गया था वह जमानती है इसलिए जमानत स्वीकार की जाए।
साथ ही उन्होंने अली की गैर मौजूदगी पर आपत्ति जताते हुए कहा कि शिकायतकर्ता होने के नाते उनका अदालत में पेश होना जरूरी है। दरअसल, सुनवाई के दौरान अली के वकील भी पेश नहीं हुए। अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि अगली सुनवाई में अली के वकील व अली के पेश न होने पर याचिका खारिज कर दी जाएगी।
क्या था मामला
साबिर अली ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया था कि नकवी ने मार्च में उन्हें आतंकवादी भटकल का दोस्त बताया था। सोशल मीडिया के जरिये विदेशों में और विभिन्न अखबारों और चैनलों पर इस कहानी का प्रसारण हुआ।
अली ने आरोप लगाया कि भाजपा में शामिल होने के तीन-चार घंटे बाद उन्हें अपने रिश्तेदारों, दोस्तों और मीडियाकर्मियों की तरफ से फोन आने लगे कि नकवी ने सोशल नेटवर्किंग साइट पर कथित तौर पर उनके खिलाफ ट्वीट किया है।
इस विवाद के छिड़ने के बाद भाजपा ने 29 मार्च को अली की सदस्यता रद्द कर दी थी।