चुनाव का ऐलान होते ही दिल्ली की राजनीति में राजनीतिक करंट दौड़ गया है। दिल्ली सरकार की कमियों को उजागर करने के लिए विपक्ष ने ताकत लगानी शुरू कर दी है। बुधवार को भाजपा व कांग्रेस पार्टी ने दिल्ली सरकार की स्वास्थ्य सुविधाओं पर रिपोर्ट कार्ड जारी किया।
भाजपा ने दिल्ली स्वास्थ्य सेवा को वेंटिलेटर पर बताया है। आरटीआई के आधार पर भाजपा ने इसे लेकर बुधवार को एक रिपोर्ट कार्ड जारी किया, जिसमें दिल्ली सरकार पर पांच वर्षों में स्वास्थ्य विभाग के लिए आवंटित बजट का उपयोग नहीं करना, एंटी रेबीज वैक्सीन की कमी, अस्पतालों में खांसी-जुकाम, बुखार के मरीजों की भीड़, मोहल्ला क्लीनिक पर लोगों का विश्वास नहीं समेत कई आरोप मढ़े।
लोक नीति शोध केंद्र की तरफ से इकट्ठा की गई जानकारी को भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष विनय सहस्त्रबुद्धे ने रिपोर्ट कार्ड जारी किया। 131 आरटीआई के हवाले से 44 स्वास्थ्य केंद्रों का निरीक्षण कर रिपोर्ट तैयार की गई है।
रिपोर्ट में 2014 की तुलना में 97 डिस्पेंसरी कम हुए की जानकारी के साथ ही अस्पतालों में 394 बिस्तर जोड़ने, 1000 मोहल्ला क्लीनिक की जगह 292 खोलने का आरोप सरकार पर लगाया। मोहल्ला क्लीनिक पर डॉ. सहस्रबुद्धे ने कहा कि यह क्लीनिक प्राथमिक हेल्थ केयर केंद्र का विकल्प नहीं हैं। इन्हें खोलने की जल्दबाजी से पता चलता है कि दिल्ली सरकार केवल संख्या पर ही केंद्रित है।
इस मौके पर दक्षिणी दिल्ली के भाजपा सांसद रमेश बिधूड़ी ने आप पर निशाना साधते हुए कहा कि 900 प्राइमरी हेल्थ सेंटर खोलने का वादा किया था। गरीबों को गुमराह करने के लिए मोहल्ला क्लीनिक का नाटक किया गया। अधिकांश क्लीनिक बंद रहते हैं। विजिलेंस की जांच में दिल्ली सरकार के अस्पतालों में उपकरण मानक के अनुरूप नहीं मिले।
दिल्ली सरकार ने इसकी जांच तक नहीं कराई, जबकि दिल्ली हाईकोर्ट ने भी कहा है कि दिल्ली सरकार के अस्पताल में इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी है। मलेरिया व डेंगू पर नियंत्रण भाजपा शासित एमसीडी ने किया और इसका श्रेय मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ले रहे हैं। आयुष्मान भारत योजना के लाभ से दिल्ली के गरीबों को वंचित किया जा रहा है। नई दिल्ली की सांसद मीनाक्षी लेखी ने कहा कि मुख्यमंत्री ने 30 हजार बिस्तर जोड़ने का वादा किया था, लेकिन जोड़े गए महज 394 बेड।
प्रति एक हजार लोगों पर 5 बिस्तर की व्यवस्था का वादा किया, लेकिन उपलब्ध है महज 2 बेड। 56 महीनों में हर महीने केवल 7 नए बेड ही लगा सकी है। एक भी प्राइमरी हेल्थ सेंटर नहीं खोला गया। अस्पताल में इंफ्रास्ट्रक्चर ही नहीं डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ की कमी। पंत अस्पताल का ऑपरेशन थियेटर बंद पड़ा है, लेकिन सरकार बेपरवाह है।
नीति आयोग के स्वास्थ्य सूचकांक में दिल्ली की गिरती सेहत को साफ देखा जा सकता है। 7 केंद्र शासित राज्यों के सूचकांक में दिल्ली दो पायदान फिसलकर 5वें स्थान पर आ गई है। शोध केंद्र के निदेशक डॉ. सुमित भसीन ने आरटीआई के हवाले से बताया कि दिल्ली के अस्पतालों में लेक्चरर की 66 प्रतिशत कमी है, जबकि डॉक्टरों की 34 प्रतिशत, पैरा मेडिकल स्टाफ, ओटी तकनीशियन, लैब तकनीशियन की 29 प्रतिशत कमी, नर्सों की कमी 22 प्रतिशत, प्रशासनिक कर्मचारियों की 40 प्रतिशत और श्रमिकों की कमी 38 प्रतिशत है।