फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

दिल्ली विधानसभा चुनावः भाजपा बोली, दिल्ली की स्वास्थ्य सेवाएं वेंटिलेटर पर 

Thu, 09 Jan 2020 05:23 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
विज्ञापन
दिल्ली की स्वास्थ्य व्यवस्था पर रिपोर्ट कार्ड पेश करते भाजपा नेता - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

चुनाव का ऐलान होते ही दिल्ली की राजनीति में राजनीतिक करंट दौड़ गया है। दिल्ली सरकार की कमियों को उजागर करने के लिए विपक्ष ने ताकत लगानी शुरू कर दी है। बुधवार को भाजपा व कांग्रेस पार्टी ने दिल्ली सरकार की स्वास्थ्य सुविधाओं पर रिपोर्ट कार्ड जारी किया।

विज्ञापन


भाजपा ने दिल्ली स्वास्थ्य सेवा को वेंटिलेटर पर बताया है। आरटीआई के आधार पर भाजपा ने इसे लेकर बुधवार को एक रिपोर्ट कार्ड जारी किया, जिसमें दिल्ली सरकार पर पांच वर्षों में स्वास्थ्य विभाग के लिए आवंटित बजट का उपयोग नहीं करना, एंटी रेबीज वैक्सीन की कमी, अस्पतालों में खांसी-जुकाम, बुखार के मरीजों की भीड़, मोहल्ला क्लीनिक पर लोगों का विश्वास नहीं समेत कई आरोप मढ़े। 

 लोक नीति शोध केंद्र की तरफ से इकट्ठा की गई जानकारी को भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष विनय सहस्त्रबुद्धे ने रिपोर्ट कार्ड जारी किया। 131 आरटीआई के हवाले से 44 स्वास्थ्य केंद्रों का निरीक्षण कर रिपोर्ट तैयार की गई है। 
विज्ञापन


रिपोर्ट में 2014 की तुलना में 97 डिस्पेंसरी कम हुए की जानकारी के साथ ही अस्पतालों में 394 बिस्तर जोड़ने, 1000 मोहल्ला क्लीनिक की जगह 292 खोलने का आरोप सरकार पर लगाया। मोहल्ला क्लीनिक पर डॉ. सहस्रबुद्धे ने कहा कि यह क्लीनिक प्राथमिक हेल्थ केयर केंद्र का विकल्प नहीं हैं। इन्हें खोलने की जल्दबाजी से पता चलता है कि दिल्ली सरकार केवल संख्या पर ही केंद्रित है। 

इस मौके पर दक्षिणी दिल्ली के भाजपा सांसद रमेश बिधूड़ी ने आप पर निशाना साधते हुए कहा कि 900 प्राइमरी हेल्थ सेंटर खोलने का वादा किया था। गरीबों को गुमराह करने के लिए मोहल्ला क्लीनिक का नाटक किया गया। अधिकांश क्लीनिक बंद रहते हैं। विजिलेंस की जांच में दिल्ली सरकार के अस्पतालों में उपकरण मानक के अनुरूप नहीं मिले। 

दिल्ली सरकार ने इसकी जांच तक नहीं कराई, जबकि दिल्ली हाईकोर्ट ने भी कहा है कि दिल्ली सरकार के अस्पताल में इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी है। मलेरिया व डेंगू पर नियंत्रण भाजपा शासित एमसीडी ने किया और इसका श्रेय मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ले रहे हैं। आयुष्मान भारत योजना के लाभ से दिल्ली के गरीबों को वंचित किया जा रहा है। नई दिल्ली की सांसद मीनाक्षी लेखी ने कहा कि मुख्यमंत्री ने 30 हजार बिस्तर जोड़ने का वादा किया था, लेकिन जोड़े गए महज 394 बेड। 

प्रति एक हजार लोगों पर 5 बिस्तर की व्यवस्था का वादा किया, लेकिन उपलब्ध है महज 2 बेड। 56 महीनों में हर महीने केवल 7 नए बेड ही लगा सकी है। एक भी प्राइमरी हेल्थ सेंटर नहीं खोला गया। अस्पताल में इंफ्रास्ट्रक्चर ही नहीं डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ की कमी। पंत अस्पताल का ऑपरेशन थियेटर बंद पड़ा है, लेकिन सरकार बेपरवाह है। 

नीति आयोग के स्वास्थ्य सूचकांक में दिल्ली की गिरती सेहत को साफ देखा जा सकता है। 7 केंद्र शासित राज्यों के सूचकांक में दिल्ली दो पायदान फिसलकर 5वें स्थान पर आ गई है। शोध केंद्र के निदेशक डॉ. सुमित भसीन ने आरटीआई के हवाले से बताया कि दिल्ली के अस्पतालों में लेक्चरर की 66 प्रतिशत कमी है, जबकि डॉक्टरों की 34 प्रतिशत, पैरा मेडिकल स्टाफ, ओटी तकनीशियन, लैब तकनीशियन की 29 प्रतिशत कमी, नर्सों की कमी 22 प्रतिशत, प्रशासनिक कर्मचारियों की 40 प्रतिशत और श्रमिकों की कमी 38 प्रतिशत है।

दिल्ली सरकार ने तोड़ी स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़: कांग्रेस

चुनाव का आगाज होते ही कांग्रेस पार्टी दिल्ली सरकार पर हमलावर हो गई है। लचर स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर पार्टी ने दिल्ली सरकार पर कई आरोप मढ़े हैं। कांग्रेस ने आंकड़ों के आधार पर बताया कि मरीजों की संख्या तो लगातार बढ़ी, लेकिन ना तो अस्पतालों की संख्या बढ़ी और ना ही डॉक्टरों की। दिल्ली सरकार ने स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर करने के लिए पांच साल कोई काम नहीं किया। 

कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता मुकेश शर्मा ने प्रेस कान्फ्रेंस में कहा कि आप 21 नए अस्पताल बनाने का वादा करके सत्ता में पहुंची थी। जमीन भी मौजूद है, लेकिन अस्पतालों का निर्माण नहीं हुआ। कैंसर से हजारों लोग मर रहे हैं। दिलशाद गार्डन कैंसर इंस्टीट्यूट में पिछले पांच साल में 7809 कैंसर से मौत हुई। पांच साल के बजट में 46 फीसदी राशि खर्च नहीं की गई। 

डॉक्टरों सहित अन्य पदों पर नियुक्तियों के लिए 820 स्वीकृत पदों पर 493 नियुक्ति हुई। जनकपुरी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल केवल नाम का है सुपर स्पेशियलिटी है। लोकनायक अस्पताल में चार ऑपरेशन थियेटर बंद हैं। द्वारका में 500 बेड का कॉलेज अस्पताल बनाया जाना था। कांग्रेस ने अपने शासनकाल में मेडिकल की पढ़ाई के लिए 4900 सीटें बढ़ाई थी। आप ने कोई नया कॉलेज नहीं खोला।

निजी अस्पताल में उपचार क्यों, जवाब दे आप
कांग्रेस ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से सवाल किया कि अगर दिल्ली का सरकारी स्वास्थ्य मॉडल इतना अच्छा है तो उन्होंने अपना व अपने परिवार का इलाज निजी अस्पताल में क्यों कराया? सरकारी खजाने को अपने इलाज में क्यों खर्च किया गया।

केजरीवाल और उनके परिवार के इलाज पर 12 लाख 80 हजार खर्च हुए तो उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने 13 लाख 21 हजार रुपये खर्च किए। इसी तरह दिल्ली सरकार के मंत्री गोपाल राय की इलाज में भी 7 लाख रुपया से अधिक खर्च किया गया। नैतिकता के आधार पर स्वास्थ्य मंत्री को इस्तीफा दे देना चाहिए।
विज्ञापन

दिल्ली सरकार के सभी अस्पतालों में इलाज मुफ्त : केजरीवाल

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली के सभी सरकारी अस्पतालों व मोहल्ला क्लीनिकों में सभी इलाज मुफ्त है। चाहे वह गरीब हो या अमीर। अगर किसी सरकारी अस्पताल में एमआरआई नहीं हो रहा है, तो वह व्यक्ति किसी प्राइवेट अस्पताल में करा सकता है और उसका खर्च दिल्ली सरकार दे रही है।

दूसरी तरफ केंद्र सरकार की आयुष्मान भारत योजना के तहत उनका इलाज नहीं किया जाएगा, जिनके पास स्कूटर, फ्रिज, मोबाइल और 10 हजार रुपये से अधिक परिवार की मासिक सैलरी है। यूपी और हरियाणा के लोग दिल्ली में इलाज कराने आते हैं। 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें