भाजपा के दिल्ली में सरकार बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके साथ ही पार्टी विधायकों में विधायक दल का नेता बनने की होड़ लग गई है। सूत्रों के मुताबिक पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने प्रदेश इकाई के कई नेताओं से इस संबंध में बातचीत भी की है।
सुप्रीम कोर्ट में सरकार के गठन के संबंध में सुनवाई की तारीख नजदीक आने के साथ ही भाजपा आलाकमान सक्रिय हो गया है। पार्टी के आला नेताओं और प्रदेश नेताओं के बीच शनिवार को कई दौर की बैठकें हुईं।
सूत्रों के अनुसार बहुमत के प्रति प्रदेश नेता आलाकमान को संतुष्ट नहीं कर सके। हालांकि उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकार बन जाने के बाद बहुमत का इंतजाम भी हो जाएगा।
विधायक दल के नेता का नाम तय नहीं, दौड़ में उतरे कई
दूसरी ओर आला नेताओं के समक्ष विधायक दल का नेता तय करने का मामला फंसा हुआ है। पार्टी ने डॉ. हर्षवर्धन के नेतृत्व में विधानसभा चुनाव लड़ा था। वह सांसद बनने के साथ केंद्र्र सरकार में मंत्री बन गए हैं।
मगर वह अभी भी मुख्यमंत्री बनने के लिए आलाकमान के समक्ष दावा कर रहे हैं। उनके अलावा विधायक प्रो. जगदीश मुखी भी विधायक दल का नेता बनने के लिए जोर लगा रहे हैं।
प्रदेश भाजपा के पूर्व अध्यक्ष विजय गोयल व विजेंद्र गुप्ता भी मुख्यमंत्री बनने की दौड़ में लगे हैं। इतना ही नहीं, समस्त वरिष्ठ नेताओं को प्रदेश अध्यक्ष की दौड़ में पछाड़ने में कामयाब रहे सतीश उपाध्याय भी मुख्यमंत्री बनने के लिए लॉबिंग में जुटे हैं।
राज्यपाल किसे बुलाएं, इसपर रहेगा असमंजस
दिल्ली सरकार में सरकार बनाने के लिए भाजपा को न्योता देने में उपराज्यपाल नजीब जंग के समक्ष असमंजस की स्थिति पैदा हो सकती है।
क्योंकि वर्तमान में भाजपा विधायक का नेता कोई भी नहीं है। नियम व परंपरा के अनुसार विधायक दल के नेता को सरकार बनाने का न्योता दिया जाता है।
राजनीतिक जानकारों की माने तो ऐसी स्थिति में उपराज्यपाल प्रदेश भाजपा अध्यक्ष को पत्र लिखकर विधायक दल के नेता के नाम के बारे में पूछ सकते हैं।
इसके अलावा विधायक दल के निवर्तमान नेता डॉ. हर्षवर्धन से भी उनके बाद विधायक दल का नेता कौन होगा इस बाबत पूछ सकते हैं।