दिल्ली विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ भाजपा अपना वोट बैंक बढ़ाने के साथ साथ विरोधी पार्टी के लोगों को तोड़ने में भी लग गई है। सोमवार को आम आदमी पार्टी के नेता गुगन सिंह से इसकी शुरूआत हो गई। हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव की तरह भाजपा एक बार फिर कुनबा तोड़ राजनीति में जुट गई है।
लोकसभा चुनाव में आप विधायक अनिल वाजपेयी, कर्नल देवेंद्र सहरावत और कपिल मिश्रा जैसे कई बड़े चेहरे भाजपा का पटका पहने दिखाई दिए। हालांकि कुनबा तोड़ने की यह राजनीति सत्ताधारी पार्टी की ओर से भी देखने को मिली। लेकिन कोई बड़ा चेहरा आप कार्यालय में दिखाई नहीं दिया। उस वक्त स्थिति यह थी कि हर दूसरे दिन भाजपा अपने प्रदेश कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस करती और नए-नए चेहरों को मंच पर लाकर खुलासा करती थी। पार्टी हाईकमान से जुड़े एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने आम आदमी पार्टी के कई नेता और कार्यकर्ताओं को अपने परिवार में शामिल किया था।
और बड़े चेहरों के स्वागत की तैयारी
दिल्ली भाजपा के सूत्रों का कहना है कि गुगन सिंह के रूप में अभी तो महज एक शुरूआत है। आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के कई बड़े चेहरे दिल्ली भाजपा के प्रदेश कार्यालय में एक दूसरे का मुंह मीठा कराते दिखाई देंगे। उन्होंने यहां तक कहा है कि पार्टी ने इनके स्वागत की तैयारी भी कर ली है।
लोकसभा चुनाव में हंसराज हंस ने गुगन को दी थी मात
उत्तर पश्चिम संसदीय क्षेत्र को 71 वर्षीय गुगन सिंह का गृह क्षेत्र माना जाता है। मतदाताओं की संख्या के लिहाज से यह सीट हर पार्टी के लिए चुनाव में अहम रही है। साथ ही इस सीट के अंतर्गत आने वाली 10 विधानसभा क्षेत्र भी। वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव में बवाना सीट से गुगन सिंह भाजपा प्रत्याशी थे। उन्होंने आप के मनोज को 25 हजार 639 वोटों से हराकर अपना परचम लहराया था।
वर्ष 2015 के विधानसभा चुनाव में भी गुगन सिंह भाजपा के प्रत्याशी थे लेकिन इस बार आम आदमी पार्टी के वेद प्रकाश से उन्हें हार मिली। इस बार गुगन सिंह को 58 हजार 371 वोट ही मिले थे। इसके ठीक दो वर्ष बाद जुलाई 2017 में गुगन सिंह ने आप का दामन थाम लिया। आप ने उन्हें लोकसभा चुनाव में टिकट दिया, पर भाजपा उम्मीदवार हंसराज हंस से हार गए।