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'आखिरी मौके' को कैश कराने में जुटी भाजपा

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भाजपा दिल्ली में सरकार बनाने के 'अंतिम मौके' को कैश करने की तैयारी में है। आलाकमान की ओर से इस आशय का संकेत मिलने के बाद केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, प्रदेश के प्रभारी प्रभात झा और प्रदेश अध्यक्ष सतीश उपाध्याय संख्या गणित सुलझाने में जुट गए हैं।
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दिल्ली के राज्यपाल उपराज्यपाल नजीब जंग की ओर से सबसे बड़े दल को सरकार बनाने का मौका देने की अनुमति मांगे जाने के बाद इस बार पार्टी में सरकार बनाने का हिमायती सरकार न बनाने की राय रखने वाले तबके पर भारी पड़ रहा है।

इस तबके का तर्क है कि इस मौके को न भुनाने की चूक करने के बाद पार्टी के पास चुनाव मैदान में उतरने के अलावा अन्य कोई विकल्प नहीं बचेगा। ऐसे में जबकि खुद पार्टी के आंतरिक सर्वे में आम आदमी पार्टी का ग्राफ कम न होने के साफ संकेत मिले हैं, तब सरकार बनाने के बदले चुनाव मैदान में उतरने का फैसला आत्मघाती साबित हो सकता है।
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सूत्रों के मुताबिक पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने भी सरकार बनाने की सारी संभावनाएं टटोलने की हरी झंडी दे दी है। हरी झंडी मिलने के बाद ही गडकरी ने इस संबंध में गृह मंत्री राजनाथ सिंह से लंबी बातचीत की है।

अमित शाह के इशारे पर हो रहा ये काम

उल्लेखनीय है कि गडकरी, राजनाथ और अध्यक्ष बनने से पहले शाह भी दिल्ली में सरकार बनाने के हिमायती रहे हैं। हालांकि सूत्रों का कहना है कि अगले दो दिनों तक इस मुद्दे पर पार्टी में व्यापक विचार विमर्श का दौर लगातार जारी रहेगा और अंतिम फैसला सोमवार को लिया जाएगा।

भाजपा चुनाव मैदान में उतरने से बचने के लिए सरकार बनाने का दांव चल सकती है। उपराज्यपाल की ओर से सबसे बड़े दल को सरकार बनाने का मौका दिए जाने के लिए राष्ट्रपति से मांगी गई मंजूरी के बाद इस सिलसिले में भाजपा में हलचल तेज हो गई है।

इस संबंध में गृह मंत्री से लंबे विचार विमर्श के बाद गडकरी ने प्रदेश प्रभारी प्रभात झा और प्रदेश अध्यक्ष सतीश उपाध्याय के साथ लंबी बैठक की। पार्टी सूत्रों का कहना है कि सारी हलचल इस संबंध में पार्टी अध्यक्ष शाह की ओर से हरी झंडी मिलने के बाद शुरू हुई है। शाह ने सरकार बनाने की सारी संभावनाएं और विकल्प पर विचार विमर्श की अनुमति दी है।

पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि चूंकि इस मौके के चूकने के बाद पार्टी के पास चुनाव मैदान में उतरने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं बचता, इसलिए इस बार सरकार बनाने की दिशा में गंभीर प्रयास हो रहे हैं। उक्त नेता के मुताबिक फिलहाल सवाल जरूरी संख्या बल जुटाने की है। अंतिम फैसला संख्या बल जुटने के साथ-साथ समर्थन में आए विधायकों की शर्तों पर निर्भर करेगा।
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इस विकल्प पर भी विचार कर रही हैं भाजपा

पार्टी में इस बात पर भी मंथन हो रहा है कि अगर कुछ विधायक मतविभाजन के दौरान गैरहाजिर रखने का विकल्प रखते हैं तो इस पर विचार किया जाए या नहीं।

पार्टी के एक वरिष्ठ नेता का यह भी कहना था कि अगर पार्टी सरकार बनाने के बाद उसे नहीं बचा पाई, फिर भी न केवल चुनाव को तत्काल टाला जा सकता है, बल्कि कार्यवाहक मुख्यमंत्री के तौर पर पार्टी की छवि निखारी जा सकती है।

दरअसल बीते दिनों पर भाजपा ने सरकार बनाने की कोशिश की थी तो पार्टी का एक बड़ा धड़ा इसके विरोध में खड़ा हो गया था। वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी जहां इसके मुखर विरोधी थे, वहीं खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरकार और पार्टी की छवि के प्रति चिंता जाहिर की थी।

हालांकि तब गडकरी, राजनाथ और शाह सरकार बनाने के पक्षधर थे। इस बार परिस्थितियां बदली हुई हैं। माना जा रहा है कि शाह इस बीच मोदी से भी संपर्क साधेंगे और उसके बाद अंतिम फैसला कर लिया जाएगा।
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