दिल्ली प्रदेश भाजपा ने आम आदमी पार्टी के विधायक से सरकार के लिए समर्थन करने की सौदेबाजी के स्टिंग में फंसे अपने उपाध्यक्ष शेर सिंह डागर को और एक सप्ताह का समय दिया है।
उनको हिदायत दी गई है कि वह आप विधायक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने के अपने ऐलान को पूरा करें। वह ऐसा नहीं करेंगे तो उनके खिलाफ पार्टी कार्रवाई करने पर विचार कर सकती है। यह जानकारी प्रदेश सतीश उपाध्याय ने शुक्रवार को मीडिया से रूबरू होने के दौरान दी।
उपाध्याय ने बताया कि अगर हफ्ते भर में कानूनी कार्रवाई नहीं करते हैं तो उनके खिलाफ पार्टी कार्रवाई कर सकती है। क्योंकि पार्टी ने उनको किसी से भी बात करने के लिए अधिकृत नहीं किया था और स्टिंग ऑपरेशन के चलते पार्टी की छवि खराब हुई है।
ये है बचाव की असली वजह
सूत्रों के अनुसार पार्टी ने शेर सिंह डागर को बचाने का प्रयास शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में उनको एक सप्ताह का समय दिया गया है। उनको पार्टी से निकालना नुकसानदायक हो सकता है। वह पार्टी से बाहर जाते ही कुछ भी बोलकर पार्टी को कटघरे में खड़ा कर सकते हैं, जिसका पार्टी को आगामी विधानसभा चुनाव में भारी नुकसान हो सकता है।
उन्होंने बताया कि शेर सिंह डागर ने बृहस्पतिवार की शाम को कारण बताओ नोटिस का जवाब दे दिया है। उन्होंने अपने जवाब में वे ही सभी बातें कहीं जो उन्होंने आप का स्टिंग ऑपरेशन सामने आने के बाद मीडिया के समक्ष की थीं।
उस समय उन्होंने कहा था कि आप ने उनके साथ षड्यंत्र किया और वह उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेंगे। मगर अभी तक उन्होंने ऐसा नहीं किया है।
शीला के समर्थन में उतरे उनके 'करीबी' विधायक
दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री और केरल की पूर्व राज्यपाल शीला दीक्षित के बृहस्पतिवार को दिए गए बयान पर जहां एक पूर्व विधायक ने उन्हें पार्टी से निकालने की मांग की थी, वहीं अब कुछ विधायक उनके समर्थन में उतर गए हैं।
शीला दीक्षित के समर्थक विधायक चौधरी मतीन अहमद ने कहा है कि आखिर शीला दीक्षित ने गलत क्या कहा है? अगर भाजपा के पास नंबर है तो उसे फिर कौन रोक सकता है। सिर्फ विरोध करने के लिए विरोध नहीं होना चाहिए।
विधायक आसिफ मोहम्मद खान, हसन अहमद और प्रहलाद सिंह साहनी ने भी बयान में कुछ गलत नहीं होने की बात कही है। वहीं कांग्रेस के कुछ नेता अब भी बयान से पार्टी के नुकसान की बात कह रहे हैं।