मंगलवार को लखनऊ विधानसभा में भाजपा के कई विधायकों के धरने पर बैठने की घटना से भाजपा आलाकमान क्षुब्ध है। आलाकमान ने राज्य इकाई को तत्काल हालात संभालने का निर्देश देने के साथ पूरी घटना की रिपोर्ट मांगी है।
विधायकों के इस अभूतपूर्व कदम के पीछे राज्य में दो कद्दावर नेताओं के बीच चल रही रस्साकसी को मुख्य कारण बताया जा रहा है। इस घटना से भाजपा आलाकमान के कान खड़े हो गए हैं।
पार्टी सूत्रों के मुताबिक आलाकमान ने इस घटना को काफी गंभीरता से लिया है। राज्य इकाई से कहा गया है कि वह धरना पर बैठने वाले नेताओं को ऐसी घटना की पुनरावृत्ति न करने का सख्त निर्देश दे।
इसके बाद संगठन के स्तर पर कई विधायकों से बातचीत कर उन्हें आलाकमान के निर्देश से अवगत करा दिया गया है। राज्य इकाई जल्द ही इस पर आलाकमान को विस्तृत रिपोर्ट देगी।
सूत्रों के मुताबिक इस लड़ाई की मुख्य वजह राज्य में दो शीर्ष नेताओं के बीच जारी रस्साकसी है। इनमें से एक नेता जो कि मंत्री भी हैं, वह अपने विभागों से जुड़े मामलों की जांच के आदेश के बाद से ही बेहद नाराज हैं।
कुछ दिन पूर्व उक्त वरिष्ठ मंत्री ने कई केंद्रीय नेताओं से मुलाकात कर इस मामले में अपनी बात रखी थी। इसी बीच विधानसभा में सौ से अधिक विधायकों के धरने पर बैठने की घटना हो गई।
राज्य इकाई आलाकमान को बताएगा कि विधायकों का धरने पर बैठना स्वत:स्फूर्त था या पूर्व नियोजित। आलाकमान झारखंड विधानसभा चुनाव नतीजे आने के बाद राज्य की स्थिति पर गंभीरता से विचार-विमर्श करेगा।
गाजियाबाद के फूड इंस्पेक्टर व लोनी विधायक से जुड़ा है मामला
दरअसल पूरा मामला गाजियाबाद से जुड़े एक फूड इंस्पेक्टर और लोनी विधायक नंद किशोर गुर्जर के बीच हुए विवाद से जुड़ा है। लाइसेंस जारी करने पर हुए विवाद के बाद दोनों आमने-सामने आ गए थे।
इसके बाद दोनों पक्षों ने एक दूसरे पर उत्पीड़न का आरोप लगाया। मंगलवार को गुर्जर ने यह मामला विधानसभा में उठाने की कोशिश की। अनुमति नहीं मिलने पर पार्टी के सौ से अधिक विधायक विधानसभा में ही धरने पर बैठ गए थे।