दिल्ली प्रदेश भाजपा बार-बार कह रही है कि उपराज्यपाल उन्हें बुलाएंगे तो वे सरकार बनाने से भागेंगे नहीं, लेकिन प्रदेश पार्टी कार्यालय में इसको लेकर कोई सरगर्मी नहीं दिखाई दे रही है।
सरकार बनाने को लेकर रणनीति भी नहीं तैयार हो रही, जबकि डूसू चुनाव को लेकर बैठक का दौर लगातार जारी है। डूसू बनाम सरकार बनाने की कवायद को लेकर प्रदेश कार्यालय की सरगर्मी और नेताओं का नजरिया काफी अलग है।
प्रदेश कार्यालय का हाल देखकर तो ऐसा मालूम हो रहा है कि प्रदेश इकाई दिल्ली में सरकार बनाने की मुहिम से बिलकुल ही अलग है। आमतौर पर जब भी सरकार बनाने का मुद्दा गरमाता है तो प्रदेश भाजपा कार्यालय में गहमागहमी बढ़ जाती है, लेकिन शनिवार दोपहर को ऑफिस में शांति रही।
प्रदेशाध्यक्ष सतीश उपाध्याय के कार्यालय पहुंचने पर भाजपा दफ्तर में कुछ रौनक तो दिखी लेकिन न तो विधायक ही पहुंचे और न ही भाजपा के रणनीतिकार। उपाध्याय भी कार्यकर्ताओं से मिलकर उनकी समस्याएं पूछ रहे थे। इस दौरान भी सरकार बनाने को लेकर कोई तैयारी नहीं दिखी।
सरकार बनाने से पहले ये है लक्ष्य
प्रदेश का कोई भी नेता यह कहने की स्थिति में नहीं है कि दिल्ली में भाजपा सरकार बनाने की कोई रणनीति भी तैयार कर रही है।
शाम चार बजे ऑफिस में अचानक गहमागहमी बढ़ गई, लगा कि कोई जरूरी बैठक होनी है। लेकिन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की राजनीति से उठकर जो नेता भाजपा में शामिल हुए हैं वे ही डूसू चुनाव को लेकर मंथन कर रहे थे।
बाद में प्रदेशाध्यक्ष, प्रदेश संगठन महामंत्री विजय शर्मा, सांसद रमेश बिधूड़ी, प्रवेश वर्मा, प्रदेश उपाध्यक्ष आशीष सूद, अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष आतिफ रशीद समेत कई नेता बैठक में शामिल हुए। यहां सिर्फ डूसू चुनाव को लेकर चर्चा हुई।
डूसू चुनाव को लेकर बैठक खत्म होने के कुछ देर बाद एक और बैठक हुई। इसमें अनुसूचित जाति मोर्चा के कार्यकर्ता शामिल हुए। इसमें भी सरकार बनाने को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई। सतीश उपाध्याय भी अपने कमरे में कार्यकर्ताओं से मुलाकात करते दिखे।
रात-दिन एक किए हैं युवा नेता
सरकार बनाने की सतही मुहिम से प्रदेश भाजपा के बड़े नेता भी दूरी बनाए हुए हैं। कुछ विधायकों की बात छोड़ दी जाए तो ज्यादातर विधायक भी बहुत ही कम मौके पर दिखाई दे रहे है।
प्रोफेसर वीके मल्होत्रा, विजय गोयल, विजेंद्र गुप्ता और डॉक्टर हर्षवर्धन समेत कई नेता ऑफिस में नहीं पड़ते। डॉक्टर नंद किशोर गर्ग, साहिब सिंह चौहान, आरपी सिंह, मोहन सिंह बिष्ट, कुलवंत राणा और कुछ अन्य विधायकों को छोड़ तो बाकी विधायक प्रदेश कार्यालय से दूरी ही हुए हैं।
प्रदेश भाजपा उपराज्यपाल के फैसले का इंतजार तो कर रही है, लेकिन ज्यादातर नेता इन दिनों काफी व्यस्त है। डूसू चुनाव को लेकर युवा नेता तो दिन-रात एक किए हुए हैं। विधायकों और पार्षदों को भी इस मुहिम से जोड़ा गया है। वहीं प्रदेश प्रभारी होने से विधायक प्रोफेसर जगदीश मुखी हरियाणा के चुनाव में व्यस्त हैं।
सरकार बनाने के मसले पर विधायक भी दो फाड़ है। कुछ विधायक तो बेबाकी से कहते हैं कि हम चुनाव में जाना ज्यादा बेहतर मानते हैं। सांसद रमेश बिधूड़ी में भी साफ तौर पर कहा है कि भाजपा चुनाव में जाना चाहती है। इसी तरह विधायक आरपी सिंह, डॉक्टर नंद किशोर गर्ग और साहिब सिंह चौहान भी चुनाव के पक्ष में दिखाई पड़ते है।