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दिल्ली डिप्थीरिया मौत मामला: भाजपा नेता का बेतुका बयान- 'भगवान ने बच्चों की इतनी ही उम्र लिखी थी'

Thu, 04 Oct 2018 05:43 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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भाजपा पार्षद वीणा वीरमानी
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डिप्थीरिया से जहां दिल्ली के महर्षि वाल्मीकि अस्पताल में आए दिन बच्चों की मौत हो रही है। वहीं बुधवार को उत्तरी दिल्ली नगर निगम की बैठक में भाजपा पार्षद का बेतुका बयान हंगामे की वजह बना। स्टैंडिंग कमेटी की चेयरपर्सन वीणा वीरमानी का कहना था कि, 'शायद इन बच्चों की भगवान ने इतनी ही उम्र लिखी थी?' इस पर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के पार्षदों ने जबरदस्त विरोध किया और बयान पर माफी मांगने को कहा। इनका कहना था कि जिन परिवारों के मासूम बीमारी और लापरवाही के शिकार हो रहे हैं, उनको न्याय दिलाने की जगह इस तरह की बातें करके भावनाओं को आहत किया है।

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कांग्रेस पार्षद मुकेश गोयल का कहना है कि बच्चों की मौत की जिम्मेदारी लेने और दवाइयों का प्रबंध करने के बजाय बीजेपी नेता इस मुद्दे को भटकाना चाह रहे हैं। अगर अस्पताल में सबकुछ भगवान भरोसे ही है तो इलाज के लिए दवाइयां क्यों मंगाई गईं। उन्होंने ये भी कहा कि अस्पताल की जांच रिपोर्ट में भी कई खामियां उजागर हुई हैं। उन खामियों को दूर करने की जगह निगम के मेयर और भाजपा पार्षदों के अलावा अधिकारी भी आड़ लेकर मामले मेें टालमटोल करने में जुटे हुए हैं।  

वहीं आप पार्षद अनिल लकड़ा का कहना था कि उन्हें जानकारी मिली है कि सीआरआई से दवाइयां समय पर नहीं मिली। इसके बाद निगम के कुछ अधिकारियों ने आपसी सांठगांठ कर प्राइवेट एजेंसी से दवाइयों के लिए संपर्क किया।  जब एजेंसी ने इसके लिए पांच लाख रुपये बतौर एडवांस मांगा तो अधिकारी चुप्पी साध गए। उन्होंने एजेंसी को एडवांस पेमेंट नहीं दिया।                   
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डिप्थीरिया से पांच और बच्चों की मौत
डिप्थीरिया से पांच और बच्चों की मौत हो गई है। इससे इस बीमारी से सितंबर से अब तक मरने वाले बच्चों की संख्या 31 हो गई है। इनमें से छह बच्चे दिल्ली के थे जबकि काफी बच्चे दूसरे राज्यों से थे।

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रिपोर्ट में अस्पताल में सुविधाओं पर उठाए सवाल

निगम की ओर से बुधवार को जांच कमेटी की रिपोर्ट को भी सार्वजनिक किया गया। रिपोर्ट में डॉक्टरों की टीम ने कहा है कि अस्पताल में ऑपरेशन थियेटर नहीं है और न ही स्टाफ पूरा है। एक्सरे और एंबुलेंस तक की व्यवस्था यहां नहीं है। दवाओं का भंडारण भी उन्हें नहीं मिला। हर साल यहां 500 के आसपास बच्चे डिप्थीरिया बीमारी से भर्ती होते हैं और इनमें से करीब 21 फीसदी की अस्पताल में मौत हो जाती है। जबकि 25 सितंबर तक मौत की ये दर 12 फीसदी के आसपास देखी गई है। इस साल एक जनवरी से 30 सितंबर के बीच अस्पताल में डिप्थीरिया के चलते 424 बच्चे भर्ती हुए, इनमें से 61 की मौत हो चुकी है।             


बॉक्स : सिंतबर माह में गलघोंटू बीमारी की स्थिति
साल       भर्ती        मौत            
2015      88        22            
2016     115       26             
2017      99        20             
2018     223       30            
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