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भाजपा पार्षदों को चाहिए सांसद-विधायकों जैसा 'सुख'

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केंद्र में भाजपा की सरकार बनने के बाद तीनों नगर निगम में उसके पार्षदों ने सांसदों व विधायकों की तरह सैलरी व अन्य भत्तों का प्रावधान कराने के लिए ऐड़ी-चोटी का जोर लगा दिया है। उन्होंने केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह से भेंट करने के बाद उनको एक पत्र भेजा है। इस पत्र में उन्होंने कई राज्यों में पार्षदों को पेंशन दिए जाने का हवाला दिया है।
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राजनाथ से मिलने के बाद तीनों नगर निगम के मेयर, स्थाई समिति के अध्यक्ष, सदन के नेता व भाजपा के अन्य वरिष्ठ पार्षदों ने बैठक की। इस दौरान उन्होंने अपनी मांग संबंधी तीन पेज का पत्र तैयार किया, जिसमें कहा गया है कि वह भी सांसदों और विधायकों की भांति कार्य करते है और सदन के सदस्य है।

इतना ही नहीं, वह जनता से सीधे तौर पर जुड़े हुए और जनता भी उनके पास सीधे अपनी पहुंच रखती है। मगर पार्षदों को सांसदों व विधायकों की तरह सैलरी व भत्ते नहीं मिल रहे है। इस कारण उन्होंने अपना कार्यालय चलाने और जनता का कार्य करने में भारी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है।
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लैपटॉप चलाना भी नहीं जानते भाजपा पार्षद

भाजपा के वरिष्ठ पार्षदों ने कहा कि पार्षदों के पास रोजाना सैकड़ों लोग आते हैं उनके कामकाज के लिए एक-दो सहयोगी होना जरूरी है। इसके अलावा पार्षदों को दिए गए लैपटॉप चलाने के लिए भी सहयोगी की आवश्कता है, क्योंकि बहुत से पार्षदों को लैपटॉप चलाना नहीं आता है।

उन्होंने पार्षदों को 50 हजार रुपये मासिक सैलरी और अन्य भत्ते देने की मांग की है। सूत्रों के अनुसार भाजपा पार्षदों ने केंद्रीय गृह मंत्री से हरी झंडी लेने के बाद ही यह कदम उठाया है।

दक्षिण दिल्ली नगर निगम में सदन के नेता सुभाष आर्य का कहना है कि जब अन्य राज्यों में पार्षदों को सैलरी व भत्ते मिल रहे है तो उन्हें भी यह सुविधा मिलनी चाहिए। गृह मंत्री भी उनके तर्क से सहमत है। इस कारण उनको उम्मीद है कि केंद्र सरकार उनके प्रस्ताव पर अवश्य गौर करेगी।

भाजपा पार्षद वर्ष 2008 से पार्षदों को सैलरी व अन्य भत्ते देने के संबंध में प्रतिवर्ष बजट को हरी झंडी देने के दौरान प्रस्ताव पास कर रहे है। मगर उनके प्रस्ताव पर कभी भी गौर नहीं की गई।
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