दिल्ली में भाजपा, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी की खिचड़ी पके तभी सरकार बनने की संभावनाएं बनेंगी।
यह गणित भी है कि भाजपा सरकार बनाने का दावा ठोके और मतदान में कांग्रेस या आम आदमी पार्टी के पांच विधायक अनुपस्थित हो जाएं।
विधायक कांग्रेस के हों या फिर 'आप' के, तुरंत चुनाव में जाने से बचने का रास्ता ढूंढना चाहते हैं, क्योंकि चुनाव में पैसा खर्च करना होगा, जीत मिले या नहीं।
मोदी लहर में कहीं धो न दे जनता
दिल्ली की राजनीति से जुड़े नेता और संविधान विशेषज्ञों का कहना है कि विधायकों को अभी डाटा एंट्री ऑपरेटर के लिए 30 हजार रुपये समेत 83 हजार रुपये का भुगतान किया जाता है।
'आप' के तमाम विधायक पहली बार चुनकर आए हैं। अगर फिर चुनाव होते हैं और मोदी लहर में जनता ने धो दिया तो अच्छा खासा वेतन हाथ से चला जाएगा।
कांग्रेस के एक विधायक ने साफ किया कि कोई भी एमएलए चुनाव नहीं चाहता, क्योंकि पैसा और टाइम फिर से खर्च करके भी जीत की गारंटी नहीं है।
बीजेपी ने छीन लीं AAP-कांग्रेस की सीटें
कांग्रेस का कोई एमएलए टूटेगा भी नहीं, क्योंकि पार्टी में बने रहे तो कुर्सी फिर मिल जाएगी। फिर लोकसभा चुनाव में जो वोट कांग्रेस के खिसके हैं, वह भी चुनाव में उतरने से रोक रहे हैं।
बता दें कि ओखला, सीलमपुर, सुल्तानपुर माजरा और बादली सीट आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस से छीन ली है और बाकी भाजपा के खाते में चली गईं।
लोकसभा चुनाव में मिली वोटों के आधार पर बीजेपी को 60 और 'आप' को 10 सीटें मिलती नजर आ रही हैं।
ऐसे बन सकती है सरकार
वर्तमान विधानसभा में भाजपा और अकाली दल मिलाकर 32 विधायक हैं। इनमें से तीन सांसद बन गए हैं। इन्हें हटा दें तो विधानसभा में 67 सदस्य रहेंगे। विधानसभा अध्यक्ष का वोट हटा दें तो 66 विधायक वोटिंग करेंगे।
ऐसे में अगर पांच विधायक सदन से अनुपस्थित हो जाते हैं तो सिर्फ 31 विधायकों की वोटिंग से भाजपा को बहुमत मिल सकता है।
भाजपा और सहयोगी दल के 29 विधायक हैं, जबकि आप से निष्कासित विनोद कुमार बिन्नी के अलावा निर्दलीय विधायक रामवीर शौकीन को जोड़कर संख्या पूरी हो जाती है। ऐसे में बतौर मुख्यमंत्री डॉ. हर्षवर्धन एमएलए बने रहेंगे तो एक सीट अधिक रहेगी।
व्हिप से बचने के भी हैं रास्ते
कांग्रेस या 'आप' की तरफ से व्हिप जारी किए जाने पर विधायक वोटिंग से बच सकते हैं। विधायक विस अध्यक्ष से छुट्टी लेने, अचानक अस्पताल में भर्ती हो जाने या पार्टी स्तर पर वोटिंग के समय नहीं पहुंचने का मान्य कारण दिए जाने पर सदस्यता बचा सकते हैं।
लोकसभा और दिल्ली विधानसभा के पूर्व सचिव एसके शर्मा बताते हैं कि संवैधानिक प्रक्रिया के तहत अगर कोई सदस्य पार्टी के वोटिंग से संबंधित आदेश का पालन नहीं करता है और पार्टी अध्यक्ष के पास शिकायत करती है तो सदस्यता रद्द हो सकती है, लेकिन पार्टी सदस्य के सदन में नहीं पहुंचने के वाजिब कारण से संतुष्ट होकर अध्यक्ष के पास शिकायत नहीं करती है तो सदस्यता को कोई खतरा नहीं है।
राजनाथ ने कहा वेट एंड वाच
प्रदेश भाजपा के नेता वर्तमान स्थिति में दिल्ली सरकार बनाना चाहते है। इस संबंध में पार्टी आलाकमान की हरी झंडी लेने के लिए प्रदेश भाजपा की कोर कमेटी ने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह से भेंट की।
राजनाथ सिंह ने उनको दो टूक कहा कि वे अपनी तरफ स सरकार बनाने की दिशा में कोई पहल नहीं करें। वे उपराज्यपाल के फैसले का इंतजार करें।
अगर उपराज्यपाल उन्हें सरकार बनाने के लिए बुलाते है तो तब सरकार बनाने के संबंध में विचार किया जाएगा।