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दिल्ली चुनाव: भाजपा को बहुमत, कांग्रेस का सफाया!

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लोकसभा चुनावों में बीजेपी की ऐतिहासिक जीतके बाद अब राजधानी दिल्ली में एक बार फिर सरकार बनाने के कयास शुरू हो गए हैं।
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आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में किसी तरह की जोड़तोड़ करके दोबारा सरकार बनाने से इंकार कर दिया है।

वहीं, बीजेपी के तीन विधायकों के सांसद बनने के बाद अब दिल्ली में फिर से चुनाव कराने का विकल्प सबसे अहम माना जा रहा है। रणनीतिकारों के मुताबिक, दिल्ली में दोबारा चुनाव होना तय है। इसके पीछे तीन मुख्य कारण गिनाए जा रहे हैं-

बीजेपी को मिल रही हैं दोगुनी सीटें!

दिल्ली में बीजेपी क‌े पास पहले ही बहुमत नहीं ‌था अब तीन विधायकों के सांसद बनने से उसके सदस्यों की संख्या 32 से घटकर 29 हो गई है।

बीजेपी ने दिल्ली में सरकार बनाने के लिए किसी भी तरह की जोड़तोड़ करने से पहले ही इंकार कर दिया था। अब बीजेपी लोकसभा चुनाव में मिली जबरदस्त सफलता को भुनाने से चूकना नहीं चाहती।

दिल्ली की सातों लोकसभा सीटें जीतने वाली बीजेपी को अगर विधानसभाओं के आधार पर मिले वोटों पर गौर करें तो उसे 70 में से 60 सीटें मिलती नजर आ रही हैं जबकि 'आप' को 10 सीटें मिल रही हैं। यानी एक बार फिर कांग्रेस का सूपड़ा साफ होने के संकेत हैं। ऐसे में बीजेपी जरूर चुनाव कराना चाहेगी।

चाहकर भी सरकार नहीं बना सकती AAP

पिछले साल दिल्ली में चमत्कारिक जीत के साथ राजनीति में कदम रखने वाली आम आदमी पार्टी ने 49 दिनों तक सत्ता संभाली और फिर इस्तीफा दे दिया।

लोकसभा चुनावों आम आदमी पार्टी भले ही अपना गढ़ बचाने में नाकाम रही है ‌लेकिन वोटों के मामले में उसने कांग्रेस को और पीछे छोड़ दिया है।

आम आदमी पार्टी ने ट्विटर पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए यह साफ किया है कि वह दिल्ली में जोड़तोड़ से सरकार नहीं बनाएगी। पार्टी ने दिल्ली में राष्ट्रपति शासन हटाने और विधानसभा भंग करने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दायर कर रखी है।

27 विधायकों वाली 'आप' अब दोबारा कांग्रेस के समर्थन से सरकार नहीं बना सकती क्योंकि उसने पिछली बार कांग्रेस पर ही आरोप लगाते हुए दिल्ली की सरकार से इस्तीफा दिया था।
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कांग्रेस की मजबूरी है दोबारा चुनाव

पिछले विधानसभा चुनावों में करारी हार झेलने वाली कांग्रेस को लोकसभा चुनावों में भी दिल्ली की जनता ने बड़ा झटका दिया है।

दिल्ली की सातों लोकसभा सीटें गंवाने वाली कांग्रेस के पास वर्तमान में सिर्फ आठ विधायक हैं। एक बार 'आप' को समर्थन देकर धोखा खा चुकी कांग्रेस अब दोबारा ऐसा नहीं करेगी।

8 विधायकों वाली कांग्रेस, बीजेपी के साथ मिलकर भी सरकार नहीं बना सकती। ऐसे में अब दिल्ली की जनता को राहत देने के लिए और दिल्ली में दोबारा चुनाव कराना ही अंतिम विकल्प बचता है। भले ही कांग्रेस के पक्ष में माहौल नहीं ‌है लेकिन चुनाव में जाना उसकी मजबूरी है।
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