भाजपा प्रत्याशी विमला ‘बाथम’ सरनेम के चलते चिंतित हैं। उनका सरनेम लोगों के बीच गफलत का कारण बन रहा है। लोगों में उनकी जाति ‘वैश्य’ को लेकर दुविधा न रहे इसके लिए वे विज्ञापन और प्रचार का सहारा ले रही हैं।
दरअसल, विमला बाथम ‘वैश्य’ जाति से हैं। लेकिन ‘बाथम’ सरनेम के चलते लोगों में उनकी जाति को लेकर भ्रम हो गया है। कुछ लोग उन्हें पिछड़ी जाति का समझ रहे हैं तो कुछ लोग उनके बाहर का होना मान रहे हैं।
लोगों के भ्रम को मिटाने के लिए अब बाकायदा विज्ञापनों में उनके नाम विमला बाथम के पीछे वैश्य शब्द का इस्तेमाल किया जा रहा है। साथ ही लाउड स्पीकरों के माध्यम से भी प्रचार किया जा रहा है।
भाजपा प्रत्याशी ने अमर उजाला से खास बातचीत में सरनेम से जुड़ी महत्वपूर्ण बातों को साझा किया। विमला ने बताया कि शादी से पहले नाम के पीछे ‘गुप्ता’ सरनेम इस्तेमाल करती थीं। लेकिन कानपुर में शादी होने के बाद ‘बाथम’ सरनेम लगाने लगीं।