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ये हैं दिल्ली एनसीआर में बीजेपी के 10 सूरमा

Sun, 16 Mar 2014 12:41 PM IST
नवनीत शरण/अमर उजाला, नई दिल्ली
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दिल्ली एनसीआर की चुनावी तस्वीर अब करीब-करीब साफ हो गई है। भाजपा और आप ने यहां अपनी सूची फाइनल कर दी है। कांग्रेस के नाम भी सामने ही हैं, बस औपचारिक घोषणा बाकी है।
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शनिवार को तकरीबन 12 घंटे तक चली मैराथन बैठक के बाद देर रात भाजपा ने चौथी सूची जारी कर दी। इसमें दिल्ली की सभी सात सीटों, फरीदाबाद-गुड़गांव और नोएडा की सीटों पर उम्मीदवार तय कर दिए गए। हालांकि गाजियाबाद अभी बाकी है।

भाजपा ने प्रदेश भाजपा अध्यक्ष डा. हर्षवर्धन, प्रवेश वर्मा, रमेश विधुडी, मीनाक्षी लेखी, महेश गिरि, उदित राज व मनोज तिवारी को दिल्ली से अपना प्रत्याशी घोषित किया है।
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चांदनी चौक से खेला वैश्य कार्ड

डॉ. हर्षवर्धन को चांदनी चौक से टिकट देकर भाजपा ने वैश्य कार्ड खेला है। यह क्षेत्र वैश्य बहुल क्षेत्र है। पिछले चुनाव में इस सीट से पूर्व प्रदेश अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता को कांग्रेस उम्मीदवार कपिल सिब्बल ने पटखनी दी थी। यहां की राह भाजपा के लिए आसान नहीं है। वैसे भी इस बार आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी आशुतोष हैं।

इस लोकसभा में दस विधानसभा सीटों में चार से पर ‘आप’ का कब्जा है। तीन विधानसभाओं में भाजपा का कब्जा है और दो में कांग्रेस का, जबकि एक पर जेडीयू काबिज है। विधानसभा चुनाव में कुल वोटों को देखें तो ‘आप’ को कुल 299943 मत मिले जबकि भाजपा के पक्ष में 293080 वोट गए।

कांग्रेस 243082 वोट लेकर तीसरे स्थान पर रही। ‘आप’ इस सीट की दस विधानसभा में 6863 वोट से भाजपा से आगे रही। इस क्षेत्र में बल्लीमारान और मटिया महल में बड़ी संख्या में मुस्लिम मतदाता भी हैं।

नॉर्थ-ईस्ट पर पैराशूट से उतारा प्रत्‍याशी

यहां से भाजपा ने पूर्वांचली कार्ड खेला है। वैसे तो यह इलाका पूर्वांचल बहुल नहीं है, लेकिन पूरी दिल्ली में पूर्वांचल मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए भाजपा ने यह पत्ता खोला है। यहां पर वैसे तो पैरासूट से उम्मीदवार उतारा गया है, लेकिन भोजपुरी गायक मनोज तिवारी भाजपा के स्टार प्रत्याशी हैं।

पिछले लोकसभा में यहां से कांग्रेस के जयप्रकाश अग्रवाल भाजपा प्रत्याशी बीएल शर्मा प्रेम को हराकर संसद पहुंचे थे। यहां की 10 विधानसभा सीटों में से पांच पर भाजपा का कब्जा है। जबकि तीन पर ‘आप’ और दो कांग्रेस के खाते में हैं। दस विधानसभाओं में कुल पड़े 1263927 वोट में से भाजपा को 405291 वोट मिले।

‘आप’ के खाते में 335870 जबकि कांग्रेस के पाले में 332679 मत गए। यहां भाजपा को अन्य पार्टियों से 69421 वोट अधिक मिले। इस लोकसभा में मुस्तफाबाद और सीलमपुर में बड़ी संख्या में मुस्‍लिम आबादी है।

नई दिल्ली सीट पर कड़ा मुकाबला

इस सीट से भाजपा ने अपनी राष्ट्रीय प्रवक्ता मीनाक्षी लेखी को चुनाव में उतारा है। इस लोकसभा में केंद्रीय कर्मचारी वर्ग की भूमिका चुनाव जिताने में अहम मानी जाती है।

पिछले लोकसभा चुनाव में अजय माकन पूर्व प्रदेश अध्यक्ष विजय गोयल को हरा कर संसद गए थे। यहां के दस विधानसभाओं में सात पर ‘आप’ का कब्जा है, वहीं तीन में भाजपा का कब्जा है।

इस लोकसभा में विधानसभा चुनाव के समय कुल वोट 903458 पड़े, जिसमें ‘आप’ के खाते में 342260, भाजपा के खाते में 300181 और कांग्रेस को 215097 वोट मिले। यहां अन्य पार्टियों के मुकाबले ‘आप’ को 42079 वोट ज्यादा मिले थे।

पश्चिमी दिल्ली में खेला जाट कार्ड

इस सीट से भाजपा ने पूर्व मुख्यमंत्री साहिब सिंह वर्मा के बेटे प्रवेश वर्मा को टिकट देकर जाट कार्ड खेला है। हालांकि, इस लोकसभा सीट पर पंजाबी-सिख समुदाय की तादात अधिक है। आसपास के विधानसभा में जाट समुदाय की तादात भी है।

लिहाजा, वहां भाजपा को फायदा पहुंच सकता है, लेकिन ‘आप’ प्रत्याशी जनरैल सिंह उनके लिए मुश्किलें खड़ी कर सकते हैं। पिछले लोकसभा चुनाव में यहां से कांग्रेस के महाबल मिश्रा भाजपा के जगदीश मुखी को हराकर संसद पहुंचे थे। पिछले विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी के प्रत्याशियों ने दस में से चार विधानसभा में जीत दर्ज की थी।

यहां पड़े 1264808 वोट में से भाजपा के पक्ष में 459487 वोट पड़े। आम आदमी पार्टी के पक्ष में 389099 जबकि कांग्रेस के पक्ष में 267512 वोट पड़े। अन्य पार्टियों के मुकाबले भाजपा के पक्ष में 70388 वोट अधिक पड़े। लिहाजा यहां भाजपा का पलड़ा भारी है।

नॉर्थ-वेस्ट में भुगतेंगे बाहरी होने का खामियाजा!

इस सीट से भाजपा ने उदित राज को चुनावी मैदान में उतारा है। यह सीट दिल्ली में सुरक्षित है। यहां बाहरी होने का खामियाजा उदित राज को उठाना पड़ सकता है, क्योंकि वो हाल के दिनों में भी भाजपा में शामिल हुए हैं। पहले उदित राज इंडियन जस्टिस पार्टी के सुप्रीमो थे।

लिहाजा इन्हें विरोध का सामना करना पड़ सकता है। दस विधानसभा के लिए हुए चुनाव में से पांच विधानसभा में भाजपा ने जीत दर्ज की है। आम आदमी पार्टी के खाते में दो विधायक, एक निर्दलीय विधायक और कांग्रेस के खाते में दो सीट गईं।

यहां पड़े कुल 1335338 वोट में से भाजपा को कुल 496531 वोट मिले। आम आदमी पार्टी को 342023 और कांग्रेस के पक्ष में 304160 वोट पड़े। यहां भाजपा अन्य पार्टियों से 154508 मत से आगे है।

पूर्वी दिल्ली से अन्ना समर्थक को टिकट

इस लोकसभा सीट से भाजपा ने महेश गिरि को चुनाव में उतारा है। गिरि आर्ट ऑफ लिविंग संस्था से जुड़े थे और अन्ना के आंदोलन के वक्त अहम भूमिका में थे। यहां उन्हें बाहरी उम्मीदवार का खामियाजा उठाना पड़ सकता है।

इस लोकसभा में आम आदमी पार्टी की स्थिति बेहतर है। इस लोकसभा की दस विधानसभा सीटों में से ‘आप’ को पांच, भाजपा को तीन और कांग्रेस को दो सीटें मिलीं।

यहां कुल 1121306 वोट में से भाजपा को 362013 वोट मिले। कांग्रेस को 328050 और ‘आप’ को 315312 वोट मिले थे। इस सीट पर भी भाजपा बढ़त में रही।

दक्षिणी दिल्ली से हारे हुए प्रत्याशी को टिकट

इस लोकसभा से भाजपा ने गुर्जर नेता रमेश बिधूड़ी पर एक बार फिर दांव खेला है। पिछले लोकसभा चुनाव में वो सज्जन कुमार के भाई रमेश कुमार के हाथों शिकस्त खा चुके हैं।

हालांकि, इस बार दक्षिणी दिल्ली लोकसभा में भाजपा की स्थिति ठीक दिखाई पड़ रही है। विधानसभा चुनाव की बात करें तो यहां की दस विधानसभा में से सात सीट पर जीत हासिल की है। वहीं, आम आदमी पार्टी ने तीन विधानसभा में जीत हासिल की है।

विधानसभा चुनाव में इस लोकसभा में कुल 132460 वोट पड़े जिसमें भाजपा के पक्ष में 359494 वोट पड़े। आम आदमी पार्टी के खाते में 297910 वोट मिले। अन्य पार्टियों के मुकाबले भाजपा को 61584 वोट ज्यादा मिले थे।

गौतमबुद्घ नगर सीट से उतारा विधायक

लंबा इंतजार कराने के बाद आखिरकार भाजपा हाईकमान ने गौतमबुद्ध नगर सीट से डॉ. महेश शर्मा को प्रत्याशी घोषित कर दिया। पिछले लोकसभा चुनाव में दूसरे नंबर पर रहे महेश पर ही पार्टी ने विश्वास जताया है।

2009 के लोकसभा चुनाव में डॉ. महेश दूसरे नंबर पर रहे थे और उन्हें बसपा के सुरेंद्र सिंह नागर ने 15, 904 वोटों से हराया था। हारने के बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और 2012 के विधानसभा के चुनाव में वे नोएडा से विधायक बने।

विधानसभा चुनाव में उन्होंने बसपा प्रत्याशी को 27,676 वोटों से हराकर मात दी थी। उसी वक्त हाईकमान ने कह दिया था कि वह लोकसभा के चुनाव की तैयारी भी शुरू कर दें। तभी से वे चुनाव प्रचार में जुट गए थे।

गुड़गांव से कांग्रेस के बागी सांसद को टिकट

गुड़गांव से पार्टी ने राव इंद्रजीत पर भरोसा जताया है। वे इसी सीट से सांसद हैं। यह सीट उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर जीती थी, लेकिन बाद में मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा से मतभेदों के चलते उन्होंने पार्टी को अलविदा कहकर भाजपा का दामन थाम लिया।

हालांकि इस सीट पर उन्हें AAP के चाणक्य योगेंद्र यादव से टक्कर मिलेगी लेकिन सांसद होने का फायदा भी मिल सकता है।
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फरीदाबाद सीट से भी संशय खत्म

भाजपा ने फरीदाबाद से तिगांव के विधायक कृष्णपाल गुर्जर को मैदान में उतारा गया है। वे भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष पद पर भी रह चुके हैं।

इस सीट पार्टी की जीत आसान नहीं होगी। एक ओर AAP के इंजीनियर उम्मीदवार पुरुषोत्तम डागर हैं तो दूसरी ओर कांग्रेस से भी मजबूत प्रत्याशी। ऐसे में कृष्‍णपाल गुर्जर की चुनावी राह बड़ी कठिन होने वाली है।

ग्रामीण क्षेत्रों में पार्टी की हालत बेहद खराब रही। हथीन विधानसभा में सबसे दयनीय स्थिति रही। इतना ही नहीं जिस तिगांव क्षेत्र से यहां भाजपा के एकमात्र विधायक कृष्णपाल गुर्जर चुने गए, उनमें भी हालत कुछ ज्यादा अच्छी नहीं रही।
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