आम आदमी पार्टी ने प्रवासी मजदूरों की परेशानी को लेकर केंद्र सरकार पर करारा प्रहार किया है। आप नेता राघव चड्ढा ने कहा है कि देश की आजादी के समय लाखों लोगों को इसी तरह बेघर होकर भटकना पड़ा था।
इसमें गरीबों, मजदूरों को पलायन का भयानक दर्द झेलना पड़ा था। आजादी के इतने वर्षों के बाद आज उसी तरह की स्थिति बन गई है जब मजदूर उसी तरह पलायन करने को मजबूर हो गए हैं। वे सड़कों पर दर्द लिए हुए भटक रहे हैं, लेकिन केंद्र सरकार उन्हें उनके घरों तक भेजने के लिए कोई प्रबंध नहीं कर रही है।
आप विधायक राघव चड्ढा ने रविवार को कहा कि गरीब मजदूरों को यह भयानक त्रासदी केंद्र सरकार की गलत नीतियों की वजह से झेलनी पड़ रही है। अगर केंद्र ने सोच समझकर सही तरीके से लॉकडाउन की घोषणा की होती और इसके पहले राज्यों से राय ली होती तो आज सड़कों पर इस तरह के हालात देखने को नहीं मिलते।
उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार मजदूरों के हितों को ध्यान में रखते हुए अनेक योजनाएं लागू कर रही है। श्रमिकों को पांच-पांच हजार रुपये की नकद आर्थिक सहायता दी जा रही है। दिल्ली के लगभग 71 लाख लाभार्थियों को राशन मुहैया करा रही है।
लेकिन केंद्र सरकार अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकती। उसे इस बात का जवाब देना पड़ेगा कि मजदूरों को उनके घरों तक भेजने के लिए ट्रेनों की व्यवस्था क्यों नहीं की गई।
सब कुछ फ्री तो पलायन क्यों हो रहा- भाजपा
आम आदमी पार्टी के इस हमले पर भाजपा ने पलटवार किया है। भारतीय जनता पार्टी प्रवक्ता अशोक गोयल देवराहा ने कहा कि अरविंद केजरीवाल सरकार दिल्ली में 71 लाख लोगों को राशन मुहैया कराने का दावा करती है। वह सुबह-शाम दस लाख लोगों को खाना खिलाने की बात कहती है। बिजली और पानी पहले ही फ्री हैं।
अगर वह इतने लोगों को राशन मुहैया कराती, लोगों को रहने की जगह देती है, और सब कुछ फ्री है तो श्रमिक वर्ग दिल्ली से भागने को मजबूर क्यों होता। उन्होंने कहा कि इसी बात से यह साबित हो जाता है कि केजरीवाल सरकार मजदूरों के हितों की रक्षा करने में पूरी तरह असफल साबित हुई है। मुफ्त और मदद के नाम पर वह झूठी राजनीति करती है।
केंद्र ने की श्रमिकों की मदद
भाजपा नेता अशोक गोयल देवराहा ने कहा कि केंद्र सरकार ने राज्यों के माध्यम से 80 करोड़ मजदूरों को राशन मुहैया कराया है। किसी के पास राशन कार्ड न होने पर भी उसे मदद की गई है। जनधन खातों के माध्यम से 30 करोड़ महिलाओं के खातों में सीधी 500 रुपये नकद मदद पहुंचाई गई है।
मनरेगा योजना के तहत 40 हजार करोड़ रुपये की मदद पहुंचाई गई है। ये सभी कदम मजदूरों के हितों की रक्षा के लिए उठाए गए हैं।