अभी रोजाना 7 हजार मीट्रिक टन कचरे का हो रहा निस्तारण, 2027 तक खत्म करने का लक्ष्य
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। पूर्वी दिल्ली के पर्यावरण के लिए सबसे बड़ी चुनौती बने गाजीपुर लैंडफिल साइट के कूड़े के पहाड़ को खत्म करने की कवायद तेज हो गई है। शहरी विकास मंत्री आशीष सूद ने शुक्रवार को लैंडफिल साइट का निरीक्षण कर कचरे के निस्तारण की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि 31 जुलाई तक बायोमाइनिंग की क्षमता प्रतिदिन 7 हजार मीट्रिक टन से बढ़ाकर 12 हजार मीट्रिक टन की जाए। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य दिसंबर, 2027 तक गाजीपुर में जमा पुराने कचरे का पूरी तरह खत्म करना है।
मंत्री ने कहा कि सरकार वैज्ञानिक तरीके से दिल्ली के तीनों प्रमुख लैंडफिल गाजीपुर, भलस्वा और ओखला को खत्म करने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने बताया कि फेज-2 के तहत गाजीपुर में जमा करीब 30 लाख मीट्रिक टन कचरे की बायोमाइनिंग शुरू की गई थी, जिसमें से अब तक 24 लाख मीट्रिक टन कचरे का निस्तारण किया जा चुका है और 20 एकड़ जमीन कूड़ा मुक्त हो चुकी है।
ढाई महीने में 3.39 लाख टन कचरे का निस्तारण
अप्रैल में हुए ड्रोन सर्वे के अनुसार, गाजीपुर लैंडफिल साइट पर 67.81 लाख मीट्रिक टन कचरा मौजूद था। 30 अप्रैल से 25 जून के बीच करीब 3.39 लाख मीट्रिक टन कचरे का बायोमाइनिंग के जरिये निस्तारण किया गया। इसके बाद साइट पर पुराना और ताजा समेत करीब 66.68 लाख मीट्रिक टन कचरा शेष है।
निरीक्षण में सामने आया कि 800 मीट्रिक टन कचरा रोजाना जमा हो रहा है। मंत्री ने निर्देश दिए कि नए कचरे के लिए अलग व्यवस्था तैयार की जाए, ताकि बायोमाइनिंग प्रभावित न हो। इसके लिए अगले दो माह का एक्शन प्लान तैयार कर प्रस्तुत करने को कहा गया है।
इनर्ट कचरे के निस्तारण पर भी जोर
बायोमाइनिंग के दौरान निकलने वाला इनर्ट पदार्थ (कचरे से निकली मिट्टी) भी चुनौती बना हुआ है। अधिकारियों ने बताया कि इसके निस्तारण के लिए गाजीपुर से करीब 23 किलोमीटर दूर स्थित एनटीपीसी इको पार्क में व्यवस्था की गई है। मंत्री ने एजेंसी को निर्देश दिए कि इनर्ट सामग्री को समय पर हटाने के लिए वाहनों की संख्या बढ़ाई जाए, ताकि इसके कारण बायोमाइनिंग का काम प्रभावित न हो। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि हर सप्ताह कार्यों की समीक्षा की जाए।