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इन अजीब तरीकों से भी लोग कर रहे अपने पुराने नोटों का निपटारा, 13 रुपए की चीज के लिए दिए हजार

Wed, 16 Nov 2016 10:18 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा
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एक स‌िगरेट के ल‌िए द‌िए 1000 रुपए, नोट द‌िखाता दुकानदार - फोटो : अमर उजाला
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नोटबंदी का लेनदेन पर किस हद तक प्रभाव पड़ रहा है। इसकी बानगी सोमवार रात डेल्टा-1 स्थित रेस्तरां पर देखने को मिली, जब बाइक सवार ग्राहक 13 रुपये की सिगरेट के लिए खुले रुपये न होने पर 1000 रुपये का नोट छोड़कर चला गया।
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  दुकानदार राजू ने बताया कि लोग छोटे-मोटे सामान के लिए भी 1000 और 500 रुपये के नोट दे रहे हैं। राजू ने बताया कि उसके पास बाइक सवार युवक ने 1000 रुपये का नोट देकर 13 रुपये वाली सिगरेट मांगी।
  जब दुकानदार नेे उससे खुले रुपये देने या छोटा नोट देने को कहा तो युवक ने उसे 1000 रुपये का नोट थमाते हुए कहा कि ये नोट किस काम का जब इससे एक सिगरेट भी नहीं आ सकती। राजू ने कहा कि वह बाइक सवार को नहीं जानता। वह पहली बार उसके पास आया था और यह कहते हुए चला गया कि वह बाद में आकर हिसाब कर लेगा।
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नारियल वाला भी पेटीएम से ले रहा पैसा

पेटीएम से पेमेंट ले रहा नार‌ियल वाला तो कमाई न होने से तंग है फूलवाला - फोटो : राजन राय, अमर उजाला
सेक्टर-12 में नारियल पानी बेचने वाले ब्रिज किशोर ने बताया कि नोट बंद की वजह से काम पूरी तरह से बंद हो गया है। सुबह से एक भी नारियल पानी नहीं बिक पाया है। पहले जहां एक दिन में 3 हजार रुपये तक की कमाई हो जाती थी।

वो अब सिर्फ 400 से 500 रुपये तक रह गई है। लोगों के पास खुले पैसे न होने की वजह से कोई नारियल पानी ले ही नहीं रहा है। हालत ये हो गई है कि साथ की दुकान पर पेटीएम से पेमेंट ली जा रही है। कोई ग्राहक खुल्ले पैसे नहीं दे रहे हैं तो उसके पास की दुकान पर पेटीएम से पेमेंट देने के लिए कहा जा रहा है।

पंचर ठीक कराने लायक भी नहीं हो पाई कमाई
अशोक कुमार अलग-अलग प्रकार के पौधे बेचने का काम करते हैं। इनके पास 30 रुपये से लेकर 200 रुपये तक के पौधे मिल जाएंगे। जब इनसे 500 और 1000 रुपये के नोट बंद होने के बाद उनके व्यापार पर पड़े असर के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बड़ी मायूसी से कहा कि रेहड़ी के पंचर ठीक कराने लायक भी कमाई नहीं हो पा रही है।

मंगलवार दोपहर तक मेरा एक भी पौधा नहीं बिका है। सिर्फ जेब में कुछ 5 और 10 रुपये के सिक्के पड़े हैं। पूरे दिन इन्हीं से काम चलाना है। ये सोचकर नोएडा आए थे कि यहां पर बड़ी-बड़ी कोठियां हैं तो पौधों की बिक्री अच्छी हो जाएगी। लेकिन इन दिनों तो बिजनेस पूरी तरह से ठप पड़ गया है।
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