बाइक बोट कंपनी के तहत 17 बैंक खातों में करीब 1500 करोड़ रुपये का निवेश कर रुपये ठिकाने लगा दिए गए थे। इनमें 650 करोड़ रुपये दूसरे खाते में ट्रांसफर किए गए हैं। आशंका जताई जा रही है कि यह पूरा फर्जीवाड़ा 5 हजार करोड़ से ऊपर का हो सकता है।
इसके अलावा बाइक बोट कंपनी के डायरेक्टरों ने इन पैसों से 8.75 करोड़ रुपये के वाहन खरीदे थे। इनमें 35 लग्जरी कारें व 104 बाइक शामिल हैं। पुलिस ने इन वाहनों को जब्त कर लिया है।
एसएसपी वैभव कृष्ण ने बताया कि वर्ष 2017 में बाइक बोट कंपनी का संचालन हुआ। संजय भाटी ने पहला कार्यालय नोएडा के सेक्टर-15 में खोला। इसके बाद बाइक पर निवेश कराने के लिए निवेशकों को आकर्षक ऑफर देने लगा। निवेशकों से 62100 रुपये जमा कराने लगा।
धीरे-धीरे नोएडा के बाहर बागपत, हापुड़, बुलंदशहर, अलीगढ़, गाजियाबाद, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, कानपुर, बनारस, लखनऊ तक फ्रेंचाइजी खोली गई। इसके बाद हरियाणा, मध्यप्रदेश, राजस्थान, उत्तराखंड, महाराष्ट्र में भी फ्रेंचाइजी दी गई। अक्तूबर 2018 तक करीब 2.25 लाख निवेशक बनाए गए।
वहीं, कंपनी के खिलाफ दर्ज हुई 37 एफआईआर की जांच एक एसआईटी कर रही है। इस टीम ने मुख्य आरोपी व मास्टरमाइंड संजय भाटी को 5 दिन और दूसरे विजयपाल कसाना को 3 दिन की पुलिस रिमांड पर लेकर पूछताछ की। इस दौरान कंपनी के दनकौर स्थित चीती में बनाए गए मुख्य कार्यालय में छानबीन की गई जहां से 102 बाइक बरामद हुईं।
इसके अलावा यह भी पता चला था कि आरोपियों ने पहले ही बहुत साक्ष्यों को जलाकर नष्ट कर दिया था। इसके साथ मौके से फर्जी चेक से भरे 5 बोरे भी मिले। कंपनी को बंद करने के बाद विरोध करने वाले निवेशकों को यही चेक देकर आरोपियों के भागने की योजना थी।