कुछ खास लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए प्राधिकरण को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाया गया। नोएडा के सेक्टर-25 निवासी रमेश बंसल ने यीडा के चेयरमैन डॉ. प्रभात कुमार से बीते साल नवंबर में शिकायत की थी। उसके बाद प्रारंभिक जांच हुई, जिसमें मथुरा में जमीन घोटाले की तरह हाथरस में जमीन खरीदे जाने की बात सामने आई। कई नाम भी वही मिले, जो कि मथुरा में जमीन खरीदने में शामिल रहे हैं। इस पर चेयरमैन ने सीईओ को इसकी विस्तृत जांच कराने के निर्देश दिए। सीईओ ने भी यीडा के नियोजन विभाग की महाप्रबंधक मीना भार्गव को इसकी जांच सौंपी है। हालांकि कितनी जमीन खरीदी गई और कितने रुपये खर्च हुए, इसकी सही जानकारी जांच रिपोर्ट आने के बाद मिल सकेगी, लेकिन मथुरा में 126 करोड़ रुपये के घोटाले से भी बड़ा बताया जा रहा है।
इन चार बिंदुओं पर होगी जांच
- हाथरस में किस प्रयोजन के लिए भूमि खरीदी गई
- खरीदी गई भूमि समेकित (कॉन्टिन्युअस) है या नहीं
- उस समय भूमि का उपयोग क्या था
- क्रय की गई भूमि की क्या स्थिति है
हाथरस में जमीन घोटाले के तार मथुरा से एक और तरीके से भी जुड़ रहे हैं। जिन लोगों ने मथुरा में सस्ती दर पर किसानों से जमीन खरीदी। उन लोगों से जमीन प्राधिकरण ने खरीद ली। उससे जो मुआवजा मिला उसी से हाथरस में किसानों से सस्ती दर पर जमीन खरीद ली गई। उसे फिर प्राधिकरण ने खरीदा। सूत्र बताते हैं, कि मथुरा व हाथरस में ब्लैक मनी से जमीन खरीदी गई। उसे प्राधिकरण ने खरीदा तो एक नंबर में पैसा मिला। कुछ ही समय में पैसे को कई गुना कर लिया गया।
डॉ. अरुणवीर सिंह, सीईओ यीडा ने जांच के निर्देश दिए थे, जिस पर नियोजन विभाग की महाप्रबंधक मीना भार्गव को इसकी जांच सौंपी गई है। उनसे जल्द रिपोर्ट देने को कहा गया है।