नोएडा-ग्रेटर नोएडा में व्यावसायिक संपत्ति के खरीदारों के लिए राहत की खबर है। इन संपत्तियों की दरें नए सिरे से तय की जाएंगी। संपत्ति की कुल कीमत निकालने की 10 साल पुरानी किराया पद्धति भी खत्म होगी।
बाकी संपत्तियों की तरह सर्किल रेट से कीमत निकाली जाएगी। दरअसल, नोएडा-ग्रेटर नोएडा में व्यावसायिक संपत्तियों का मूल्यांकन किराया पद्धति से होता है, जिसके तहत संपत्ति के कवर्ड एरिया और मासिक किराये को 300 से गुणा करते हैं और जो भी कीमत आती है उस पर पांच फीसदी स्टांप शुल्क लिया जाता है।
व्यावसायिक संपत्तियों का जीवन 300 माह यानी 25 वर्ष माना जाता है। संपत्ति खरीदारों को यह पद्धति आसानी से समझ में नहीं आती। इस पद्धति से व्यावसायिक संपत्तियों की कीमत भी ज्यादा हो जाती है।
कीमत कम होने के रजिस्ट्री में परेशानी होती है
आयकर विभाग भी रजिस्ट्री दस्तावेज में दिखाई गई कीमत को ही मानता है। इस कारण पूरा लेनदेन एक नंबर (व्हाइट मनी) में दिखाना पड़ता है। प्रॉपर्टी बाजार में उस संपत्ति की कीमत कम होने के कारण खरीदारों को रजिस्ट्री में परेशानी होती है। इससे दोनों शहरों में तमाम संपत्तियां रजिस्ट्री के लिए अटकी हुई हैं।
व्यावसायिक संपत्तियों का सर्किल रेट घटाने और संपत्ति की कीमत निकालने की पद्धति सरल करने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया। इस पर प्रमुख सचिव अनिल कुमार की तरफ से शासनादेश जारी हुआ है, जिसके अनुसार संपत्ति के मूल्यांकन की किराया पद्धति को खत्म करते हुए अन्य संपत्तियों की तरह ही सामान्य पद्धति अपनाने का आदेश हुआ है।
यानी अगर व्यावसायिक संपत्ति एक से अधिक मंजिल की है तो कारपेट एरिया और सर्किल रेट को जोड़कर कीमत निकाली जाएगी। उस पर पांच फीसदी स्टांप शुल्क लगेगा।
यह व्यवस्था पूरे प्रदेश में लागू करने का आदेश
सिंगल स्टोरी होने पर जमीन की व्यावसायिक दर और निर्माण की लागत को जोड़कर कुल कीमत निकाली जाएगी। इसके दो फायदे होंगे। पहला तो यह कि संपत्ति खरीदारों को आसानी से समझ में आ जाएगी। दूसरे, संपत्तियों की कीमत भी कम हो सकती है। यह व्यवस्था पूरे प्रदेश में लागू करने का आदेश हुआ है।
नोएडा और ग्रेटर नोएडा में व्यावसायिक संपत्तियों की ज्यादा कीमत होने से रजिस्ट्री अटकने से करीब 100 करोड़ रुपये का स्टांप फंसे होने का अनुमान है। नोएडा के सेक्टर-62, 38 और एक्सप्रेसवे पर तमाम ऐसी संपत्तियां हैं, जहां बाजार में प्रचलित दर की तुलना में सर्किल रेट के हिसाब से ज्यादा कीमत हो जाती है। यही हाल ग्रेटर नोएडा का भी है।
डीएम एनपी सिंह की अध्यक्षता में एडीएम वित्त राजेश यादव और एआईजी स्टांप एसके सिंह समेत कई अफसरों की कैंप कार्यालय में बैठक हुई। इसमें 30 नवंबर तक सूची को अंतिम रूप देने और 1 दिसंबर से लागू करने का निर्णय लिया गया।