दिल्ली में सम-विषम नंबर वाहन फार्मूला में एक जनवरी से सीएनजी कार, दुपहिया वाहन, महिला चालित कार, विकलांग की कार को छूट मिलना करीब-करीब तय हो गया है।
ट्रैफिक पुलिस, परिवहन विभाग एनफोर्समेंट मेंट वाहन, एसडीएम और डीएम वाहनों भी फार्मूले से बाहर रहेंगे। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के अंतिम मुहर लगने पर अगले दो दिन में नोटिफिकेशन जारी होगा। मंगलवार को अरविंद केजरीवाल छूट से जुड़ी कुछ घोषणाएं कर सकते हैं।
कांट्रैक्ट कैरिज और स्कूल बसों के रजिस्ट्रेशन की धीमी गति को देखते हुए सरकार सम-विषम फार्मूले में अधिक से अधिक वाहन को छूट देने की दिशा में भी काम कर रही है।
इन खास लोगों को मिलेगी सम-विषम फॉर्मूले से छूट
वहीं अभियान के सकारात्मक परिणाम के तौर पर वाहनो के प्रदूषण जांच कराने वाले तेजी से बढ़ी हैं। जहां एक महीने में 12-13 हजार वाहनों की जांच होती थी, अब 22 हजार तक आंकड़ा पहुंच गया है।
सूत्रों के अनुसार राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और केन्द्रीय मंत्री के अलावा लोकसभा अध्यक्ष और दिल्ली के उपराज्यपाल को भी सम-विषम फार्मूले से बाहर रखा जाएगा। वहीं पुलिस एस्कॉट को भी छूट रहेगी। दिल्ली के मुख्यमंत्री, मंत्री या विस अध्यक्ष को भी छूट नहीं होगी।
सूत्र बताते हैं कि प्रदूषण मामलों की कमेटी के अध्यक्ष सत्येंद्र जैन की अध्यक्षता में सोमवार को एक बैठक हुई। बैठक में कई पहलुओं पर चर्चा की गई। उसमें सीएनजी चालित करीब 7.5 लाख कार को सम-विषम नंबर के हिसाब से प्रतिबंध में छूट दिए जाने पर करीब-करीब सहमति बन गई है। हालांकि इसमें पहचान के तरीके को लेकर कुछ असमंजस जरूर है।
सीएनजी कार और दुपहिया वाहनों को भी मिल सकती है छूट
सूत्रों के अनुसार केन्द्र सरकार ने जो चिट्ठी दिल्ली को भेजी है उसमें भी सीएनजी चालित कार और दुपहिया वाहनों को बाहर रखने की तरफ संकेत किए हैं। बताते हैं कि इस बात पर भी सहमति बन गई है कि पब्लिक ट्रांसपोर्ट के अभाव में फजीहत से बचना है तो दुपहिया वाहनों को सम-विषम नंबर फार्मूले से बाहर रखा जाए।
इसके अलावा ऐसी कार जिसे महिला चला रही हो और उसमें सिर्फ महिलाएं हैं तो उस कार को भी छूट, विकलांग कार में सवार है तो उसे भी छूट देने का मन करीब-करीब दिल्ली सरकार ने बना लिया है।
दिल्ली सरकार के एक अधिकारी ने बताया कि 6 हजार बसें अतिरिक्त चलाने का फैसला सरकार ने किया है। लेकिन सिर्फ 600 बसें रजिस्टर हो सकी हैं। अगले पांच दिन रजिस्ट्रेशन होगा और 27 दिसंबर को ट्रॉयल के तौर पर रूट पर उन बसों को उतारा जाना है। यही वजह है कि सरकार अधिक से अधिक श्रेणी को छूट देने की दिशा में बढ़ रही है।