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चंद्रशेखर आजाद को मिली दिल्ली आने की इजाजत, कोर्ट ने कहा- चुनाव में करनी चाहिए भागीदारी

Tue, 21 Jan 2020 04:54 PM IST
पूजा त्रिपाठी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखरचंद्रशेखर आजाद को बेल देने की शर्तों में हुआ बदलाव, कोर्ट ने कहा- चुनाव में करनी चाहिए भागीदारी - फोटो : अमर उजाला
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तीस हजारी कोर्ट ने भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर की याचिका पर सुनवाई करते हुए उनकी जमानत की शर्तों में बदलाव किया है। इसके तहत अब उन्हें दिल्ली में आने की इजाजत है लेकिन इसके लिए उन्हें कोर्ट द्वारा बताई गई कुछ शर्तें पूरी करनी होंगी। मालूम हो कि अपने पूर्व आदेश में अदालत ने चंद्रशेखर को चार हफ्ते तक दिल्ली न आने का आदेश दिया था।

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अदालत ने कहा है कि चंद्रशेखर जब दिल्ली आएंगे तो उन्हें उसी पते पर रहना होगा जो कोर्ट में दिया है। इसके साथ ही जज ने उनके सामने दो कड़ी शर्तें भी रखी हैं-

  1. हर शनिवार को उपस्थिति दर्ज कराने की बजाय चंद्रशेखर जब भी सहारनपुर या दिल्ली में शनिवार को होंगे तो उन्हें डीसीपी को बताना होगा। अगर इन दोनों जगह पर वह न हों तो वह डीसीपी को फोन कर अपने बारे में बताएंगे कि वो कहां हैं।
  2. पहली शर्त सिर्फ उस समय लागू नहीं होगी जब मेडिकल समस्या हो या चुनाव का मुद्दा हो।(पहले यह शर्त सिर्फ मेडिकल कंडीशन तक सीमित थी)


एडवांस में डीसीपी क्राइम को देनी होगी कार्यक्रम की जानकारी
जज ने चंद्रशेखर से ये भी कहा कि उन्हें अपने कार्यक्रम के बारे में डीसीपी क्राइम और संबंधित डीसीपी को एडवांस में जानकारी देनी होगी। जज ने आदेश सुनाते हुए कहा कि 'लोकतंत्र में चुनाव सबसे बड़ा पर्व है, जिसमें ज्यादा से ज्यादा भागीदारी होनी चाहिए, यह उचित होगा कि चंद्रशेखर को चुनाव में भागीदारी करने दी जाए।'

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रिकॉर्ड बताते हैं किसी हिंसा में संलिप्त नहीं था चंद्रशेखर
इससे पहले जज कामिनी लाउ ने ये भी कहा था कि, 'रिकॉर्ड ये बताते हैं कि ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है जिससे ये साबित हो सके कि चंद्रशेखर किसी ऐसी गतिविधि में शामिल था जो कानून और व्यवस्था या राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए घातक हो।'

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'रोज पढ़नी चाहिए संविधान की प्रस्तावन'

जज ने कहा कि वह अपने आदेश में परिवर्तन करेंगी और चंद्रशेखर को दिल्ली आने की इजाजत देंगी। जज ने सरकार वकील से ये भी कहा कि आप इस याचिका को खारिज करने के लिए नहीं कह सकते क्योंकि आपके पास ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है।

जज ने इससे पहले कहा कि जब भी चंद्रशेखर दिल्ली आएगा तो वह अपना कार्यक्रम बताएगा कि वह कब आ रहा है, कहां जाएगा। संबंधित डीसीपी को रोजाना का शेड्यूल देना होगा।

बहस के दौरान एक जगह जज के सामने चंद्रशेखर द्वारा जामा मस्जिद में संविधान की प्रस्तावना पढ़ने की बात रखी गई तो उन्होंने एक साइड नोट में कहा कि संविधान की प्रस्तावना रोज पढ़ी जानिए चाहिए। यह हमने संविधान दिवस पर तय किया था और प्रस्तावना को तो हमें अपने दिलों में रखना चाहिए।
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