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भारत बंद: दिल्ली की राजनीतिक पार्टियों ने किसानों की लड़ाई का किया समर्थन, आप, कांग्रेस व सिख संगठन देंगे साथ

Sun, 06 Dec 2020 06:25 PM IST
Mohit Mudgal अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
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सिंघु बॉर्डर पर बैठे किसान - फोटो : amar ujala
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दिल्ली के बॉर्डर पर आंदोलन कर रहे किसान भले ही अपने प्रदर्शन को राजनीतिक से अलग किए हुए है, लेकिन आठ दिसंबर को किसानों के भारत बंद का समर्थन राजनीतिक पार्टियों का मिल गया है। आम आदमी पार्टी, प्रदेश कांग्रेस, सिख राजनीतिक संगठन समेत कई राजनीतिक पार्टियों ने बंद में शामिल होने की बात की है। उधर, प्रदेश भाजपा इस पूरे मुद्दे पर बैक फुट पर पहुंच गई है। भाजपा समर्थित दिल्ली के किसानों ने भी इस मुद्दे पर पार्टी से किनारा कर बंद का समर्थन किया है।

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दिल्ली के बार्डर पर किसानों का विरोध मंगलवार को पूरी दिल्ली में दिखेगा। प्रदेश कांग्रेस ने तो किसानों के बंद की अपील का समर्थन करते हुए भाजपा मुख्यायल का घेराव करने का निर्णय लिया है तो उधर आम आदमी पार्टी ने सभी राज्यों व जिलों के पार्टी कार्यकर्ताओं को किसानों के भारत बंद में सहयोग करने की अपील की है।  

आप के वरिष्ठ नेता गोपाल राय ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए तीन कृषि कानूनों के खिलाफ पिछले 10 दिनों से देश के अन्नदाता किसान सड़कों पर हैं। बच्चे, बूढ़े से लेकर जवान, किसान रात की ठिठुरती ठंड में भी सड़कों पर सोने के लिए मजबूर हैं। दूसरी तरफ, सरकार वार्ता पर वार्ता कर रही है। अदालतों में तारीख पर तारीख की तरह ही किसानों से वार्ता कर उनकी मांगों को टालमटोल कर दिया जा रहा है। किसान कानूनों को वापस लेने की मांग कर रही है, लेकिन सरकार जबरदस्ती फायदे गिना रही है। खेती किसान करते हैं और किसानों को पता है कि क्या फायदा व क्या नुकसान है। 
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राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने आह्वान किया है कि 8 दिसंबर को किसानों द्वारा किए जा रहे भारत बंद का पूरी तरह से समर्थन करें। यह लड़ाई देश की लड़ाई है, क्योंकि हमारा देश कृषि प्रधान देश है। अगर कृषि को खत्म किया जाएगा, तो किसान खत्म होगा और इससे देश को खत्म करने का रास्ता खुलेगा। 

भाजपा कार्यालय का घेराव करेंगे
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष चौधरी अनिल कुमार ने किसान विरोधी कानून व अन्नदाता किसानों के हितों को लेकर भाजपा मुख्यालय का घेराव करने का ऐलान किया है। कहा है कि दिल्ली कांग्रेस किसानों के इस एलान का पूर्ण समर्थन करेगी। किसान विरोधी कानून को वापस न लिए जाने से केंद्र सरकार की नियत साफ हो गई है कि किस प्रकार केंद्र सरकार हमारे भारत के अन्नदाता किसानों के प्रति उनके हितों के लिए चिंतित है। कड़कड़ाती ठण्ड में भारत का किसान जो भारत का अन्न दाता कहा जाता है अपने हितों और अधिकार के लिए खुले आसमान के नीचे बैठा है इससे ज्यादा शर्मसार बात और क्या हो सकती है। 

उधर, भाजपा चुप्पी साधे हुए है। किसान बिल पर समर्थन जुटा रही भाजपा से दिल्ली के किसानों ने भी मुंह मोड़ लिया है। खाप पंचायत, किसानों की लामबंदी, जनसंपर्क अभियान, ट्रैक्टर रैली समेत सभी कार्यक्रम भाजपा के फेल साबित हुए है। आलम यह है कि भाजपा नेता भी इन दिनों दिल्ली-देहात से दूरी बनाए हुए है।

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