दिल्ली दमकल विभाग के अधिकारियों का कहना है कि रविवार से अब तक भलस्वा लैंडफिल साइट पर आग बुझाने की कोशिशें लगातार की जा रही हैं। सोमवार को लग रहा था कि आग पर नियंत्रण हो गया है, लेकिन यह फिर से भभक उठी। उनका कहना है कि साइट से लगातार मीथेन गैस का रिसाव जारी है। इस कारण साइट से लगातार धुआं फैल रहा है। इस पर काबू पाने के लिए मौके पर फायर सर्विस की 15 गाड़ियां लगी हुई हैं। आग बुझाने के लिए पानी के अलावा निर्माण के मलबे और मिट्टी का भी उपयोग किया जा रहा है। मंगलवार को उत्तरी दिल्ली के मेयर आदेश गुप्ता व एनडीएमसी कमिश्नर मधुप व्यास ने भी मौके का निरीक्षण किया था और इस लैंडफिल साइट की समस्या का निपटारा करने के लिए लांग-टर्म व शार्ट-टर्म, दोनों तरह के उपाय करने की घोषणा की थी।
जून के बाद सबसे खराब डाटा
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एक अधिकारी के अनुसार, हालात इतने खराब हैं कि यदि हम प्रदूषण के ‘खराब’ स्तर तक भी वापसी कर पाए तो यह बड़ी उपलब्धि होगी। बोर्ड के अनुसार, बुधवार को आधे से ज्यादा मॉनीटरिंग स्टेशनों पर हवा की शुद्धता के स्तर का डाटा जून में आए आंधी के तूफान के बाद सबसे खराब स्थिति का संकेत दे रहा था।
हवा की गति में कमी से भी बढ़ी परेशानी
प्रदूषण विभाग के अधिकारी पूरे शहर में हवा की शुद्धता के बेहद खराब स्तर पर पहुंचने के लिए तापमान में आई गिरावट और हवा की गति में कमी को भी जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। हवा की गति घटने से प्रदूषित गैस स्थानीय वातावरण में ही बढ़ती रहती है, जिसके कारण प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ता है। तापमान में गिरावट के कारण ये गैस ठंडी होकर वातावरण के निचले हिस्से में आकर सीधे श्वसन क्रिया से जुड़ जाती हैं, जिससे सांस लेने में परेशानी जैसे हालात पैदा होते हैं। अधिकारी ने हवा की शुद्धता का स्तर 7 नवंबर को पड़ने वाली दिवाली तक लगातार खराब होने की संभावना जताई है।
पिछले साल दिल्ली समेत उत्तर भारत के अधिकतर इलाकों को जहरीले स्मॉग ने ढक लिया था, जिसके लिए खेतों में पराली जलाने और दीवाली पर असंख्य पटाखे चलाए जाने को जिम्मेदार माना गया था। इसके चलते कोयले से बिजली बनाने वाले कई पॉवर स्टेशन बंद करने, कंस्ट्रक्शन पर प्रतिबंध लगाने और कूडृा जलाने पर रोक लगाने जैसे कदम उठाने पड़े थे।
दिल्ली ही नहीं देश के हालात खराब
इस साल विश्व स्वास्थ्य संगठन की तरफ से जारी रिपोर्ट के अनुसार, विश्व के सबसे ज्यादा प्रदूषित शहरों में से 14 भारत में हैं, जिनमें प्रदूषण के हिसाब से दिल्ली छठे नंबर पर आती है।
ऐसे रहे बुधवार को दिल्ली में हालात
339 पीपीएम का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) रहा दिल्ली का।
600 पीपीएम आंकी गई दो मॉनीटरिंग स्टेशनों पर हवा की शुद्धता।
500 पीपीएम तक रहा हवा में प्रदूषण का स्तर अधिकतर मॉनिटरिंग स्टेशनों पर।
50 पीपीएम की अधिकतम मात्रा वाली हवा को माना जाता है शुद्ध।
301 से 400 के बीच बेहद खराब व 401 से 500 के बीच अति गंभीर होता है स्तर।
(केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार)
इंडेक्स पर वायु गुणवत्ता
0 से 50 तक अच्छी
51 से 100 तक संतोषजनक
101 से 200 के बीच मध्यम
201 से 300 के बीच खराब
301 से 400 के बीच बेहद खराब
401 से 500 के बीच खतरनाक