काउंसिल के सचिव डॉ. गिरीश त्यागी का कहना है कि आरोपी डॉक्टर दिल्ली में करीब 12 साल से मरीजों का उपचार कर रहे थे। लेकिन किसी को उन पर शक नहीं हुआ। मरीज की मौत के बाद जब शिकायत मिली तो जांच में उनकी डिग्रियां फर्जी साबित हुईं। जिसके बाद काउंसिल ने वसंत विहार थाना पुलिस को डीएमसी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज करने की सिफारिश की।
उन्होंने बताया कि राजधानी में इस तरह के मामले लगातार देखने को मिल रहे हैं। इन्हें रोकने और गलत चिकित्सा को रोकने के लिए डीएमसी लगातार कार्यवाहियां कर रही है। ये है पूरा मामला
16 नवंबर 2017 को उत्पल नाम का मरीज दो 2 बजे उल्टी और मल में रक्त आने की वजह से मुनिरका के एसएचएल अस्पताल में भर्ती हुआ था। जहां उसका इलाज डॉ. राम चंद्र यादव की देखरेख में चल रहा था। रात 11 बजे अचानक उत्पल की तबियत बिगडने के कारण उसे सफदरजंग अस्पताल में भेजा।
वहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इसके बाद सफदरजंग में ही उसका पोस्टमार्टम किया गया। मौत के बाद मृतक की बहन, जोकि स्वयं एक डॉक्टर थी, ने उस डॉक्टर पर खराब इलाज करने का आरोप लगाया और दिल्ली मेडिकल काउंसिल और पुलिस को शिकायत दी। जिसके बाद काउंसिल ने जांच शुरू की।
जांच के दौरान डॉ. यादव से गोवा मेडिकल कॉलेज की एमबीबीएस, डीसीएच और एफसीसीपी की डिग्री मिली। इसके साथ ही वे इंडियन मेडिकल असोसिएशन और इंडियन अकेडमी ऑफ पिडियॉट्रिक्स की सदस्यता भी थी।
इसी बीच सभी डिग्रियां फर्जी होने की पुष्टि हुई। उसकी डिग्री पर लिखे रजिस्ट्रेशन नंबर की जब पड़ताल की गई तब इस बात का खुलासा हुआ था डिग्री फर्जी हैं।