सीनियर आईएएस राजीव कुमार ने जेल से बचने के लिए करीब सवा तीन साल तक तमाम हथकंडे अपनाए, मगर बच नहीं पाए। आखिरकार उन्हें जेल जाना पड़ा। 20 नवंबर 2012 को सजा मिलने के बाद उसी दिन जमानत अर्जी डाली, तीन साल सजा होने के कारण सीबीआई कोर्ट से उन्हें अंतरिम जमानत मिल गई।
इसके बाद सजा के खिलाफ हाईकोर्ट चले गए। हाईकोर्ट ने अर्जी खारिज की तो उन पर फिर सरेंडर की तलवार लटक गई। इससे बचने के लिए वह सुप्रीम कोर्ट चले गए, जहां से उन्हें गिरफ्तारी पर चार हफ्तों की मोहलत ही मिल पाई, जिसकी मियाद 25 अप्रैल को खत्म हो रही थी।
जेल जाने से पहले राजीव कुमार करीब 10 मिनट कोर्ट के कटघरे में खड़े रहे, उनके चेहरे पर चिंता की लकीरें थीं। उन्हें डासना जेल के मुलाहिजा बैरक नंबर सात में रखा गया है, जहां 35 बंदी और हैं। जेल सूत्रों का कहना है कि उन्होंने शाम में खाना नहीं खाया।