प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (आयुष्मान भारत) के तहत बेशक लाभार्थी को सालाना पांच लाख रुपये का उपचार मुफ्त दिया जाता है, लेकिन कुछ मामले ऐसे भी हैं जो चौंकाने वाले हैं।
आयुष्मान भारत का कार्ड होने के बाद भी लोगों को उपचार के लिए एक से दूसरे अस्पताल में भटकना पड़ रहा है। ताजा उदाहरण यूपी के पीलीभीत निवासी राम किशोर गुप्ता का है। इनके पास आयुष्मान भारत का कार्ड होने के बाद भी एमआरआई जांच के लिए वे यूपी से दिल्ली एम्स पहुंचे।
एम्स में लंबी वेटिंग के चलते इन्हें अप्रैल 2021 में आकर जांच कराने की सलाह दी गई। इसके बाद एम्स के ही डॉक्टरों की मदद से जब मरीज गंगाराम अस्पताल में जांच कराने पहुंचा तो भर्ती होने के बाद ही जांच कराने की सलाह देते हुए उसे एमआरआई से पहले 9 हजार रुपये की कीमत के कुछ और जांच कराने के लिए कहा गया। इतना ही नहीं राम किशोर दिल्ली के ही इंडियन स्पाइनल इंजरी सेंटर में भी उपचार के लिए जा चुके हैं, लेकिन वहां भी उन्हें कोई मदद नहीं मिली।
यह जानकारी देते हुए उनके बेटे अभिनव गुप्ता ने बताया कि उनके पास अंत्योदय के अलावा आयुष्मान भारत कार्ड भी है, लेकिन उन्हें मदद नहीं मिल पा रही है। अभिनव के पिता को चलने फिरने में काफी दिक्कत है।
अभी तक बीमारी का भी पता नहीं चला है। उन्होंने यूपी के बरेली स्थित निजी अस्पतालों में भी उपचार कराने का प्रयास किया, लेकिन वहां से उन्हें एम्स भेज दिया।
मायूस अभिनव का कहना है कि सरकार पांच लाख रुपये मदद देने का दावा कर रही है, लेकिन हकीकत में उन्हें कुछ नहीं मिल रहा। उधर, एम्स के डॉक्टरों का कहना है कि मरीजों की ज्यादा संख्या होने के कारण एमआरआई की डेट 2021 से पहले नहीं दी जा सकती।