सुनपेड़ मामला मीडिया में उछलने के बाद देश-प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से छुटभैये नेता और संगठन के लोग आने लगे हैं। ऐसे लोग पीड़ित परिवार की मदद करने की बजाय एक पक्ष के खिलाफ आग उगलने का काम कर रहे हैं। बृहस्पतिवार को गांव में कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला।
दोपहर में मुख्यमंत्री के जाने के बाद छुटभैये नेता और संगठन के लोग सक्रिय हो गए। कोई हिसार से आया है तो कोई अंबाला, रोहतक, महेंद्रगढ़ तो कोई यूपी से। खुद को दलितों का सबसे बड़ा मसीहा बनने का दावा करने वाले ये लोग मीडिया समेत अन्य सवर्णों को गाली देने से भी गुरेज नहीं कर रहे हैं।
गांव में पीड़ित के घर ऐसे लोगों में फोटो खिंचवाने और टीवी में आने की होड़ मची हुई है। ऐसे लोग भाषण देकर माहौल बिगाड़ने का काम कर रहे हैं। हालांकि परिवार के लोग ऐसे लोगों से जातिवाद के नाम पर ने बोलने की नसीहत भी दे रहे हैं, लेकिन वे बाज नहीं आ रहे।
पलवल और आसपास के गांवों से आए छुटभैये लोग दलित समाज को अलग से बसाने और अलग राज्य बनाने की भी मांग करने लगे हैं।