आरबीआई ने बैंकों को आंतरिक सर्कुलर जारी करके 30 जून के बाद वर्ष 2005 से पहले के नोट नहीं लेने का आदेश दिया है। साथ ही, ऐसे पुराने नोट ग्राहकों को भी नहीं देने का भी निर्देश दिया है।
दरअसल, नकली नोटों पर रोकथाम लगाने के लिए रिजर्व बैंक ने 31 दिसंबर 2014 के बाद, 2005 से पहले के नोटों के चलन पर रोक लगाने का निर्णय लिया था। लेकिन बाजार में 2005 से पुराने नोटों के बड़ी संख्या में मौजूद होने के चलते इस समय सीमा को बढ़ा दिया है।
बैंकों को जारी किए गए सर्कुलर के मुताबिक 30 जून 2015 के बाद 2005 से पुराने नोट नहीं लेने को कहा है। जबकि ग्राहकों से मिलने वाले ऐसे नोटों को अपने पास रोक लेने का निर्देश दिया है। यह आदेश आरबीआई के प्रिंसिपल चीफ जनरल मैनेजर बीपी विजेंद्र ने 31 दिसंबर को दिया है। आदेश की कॉपी अमर उजाला के पास मौजूद है।
पीएनबी सेक्टर-44 शाखा के मैनेजर डॉ. नीरज शर्मा ने बताया ने बताया कि 2005 से पहले के नोटों को बदलने की सीमा को बढ़ा दिया गया है। 30 जून के बाद ऐसे नोट नहीं लेने का आंतरिक सर्कुलर मिला है। उन्होंने बताया कि 2005 से पहले के नोटों में नकली नोट पहचानने के करीब पांच तरीके थे। बाद में इनकी संख्या लगभग दस कर दी गई। नकली नोटों पर अंकुश लगाने की दृष्टि से ऐसे नोटों पर रोक लगायी जा रही है।