दिल्ली चुनाव में किरण बेदी को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बना पार्टी का चेहरा बना चुकी भाजपा ने अब अपनी रणनीति बदल ली है। आम आदमी पार्टी के साथ कांटे की टक्कर में बेदी दांव से भी खास लाभ न मिलता देख पार्टी ने दिल्ली विधानसभा चुनाव में एक बार फिर से पीएम नरेंद्र मोदी के नाम पर वोट मांगने का फैसला किया है।
हालांकि, बेदी पहले की तरह धुआंधार प्रचार करती रहेंगी, मगर पार्टी नेतृत्व ने चुनाव प्रचार के लिए उतारे गए देश भर के नेताओं को मोदी के नाम पर ही वोट मांगने का निर्देश दिया है। यही नहीं अगर मोदी की चार रैलियों में अपेक्षा के अनुरूप भीड़ जुटी तो पार्टी उनकी रैलियों की संख्या भी बढ़ा सकती है।
पार्टी में अंदरखाने अब वरिष्ठ नेता स्वीकार कर रहे हैं कि बीते चार विधानसभा चुनाव की तरह दिल्ली में भी महज मोदी को चेहरा बनाया जाना ज्यादा कारगर रणनीति साबित होती। पार्टी की मुश्किल यह है कि बेदी को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद भाजपा और संघ के कार्यकर्ता भी दिल से चुनाव प्रचार में खुद को नहीं झोंक रहे।
आंतरिक सर्वे में अल्पसंख्यक, दलित, सिख वर्ग के मतदाताओं का आम आदमी के प्रति गहरा झुकाव कायम रहने संबंधी आंकड़े ने भी पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है। यही कारण है कि पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने न केवल केंद्रीय मंत्रियों और केंद्रीय नेताओं को एक-एक विधानसभा सीट की जिम्मेदारी दी है, बल्कि यह भी कहा कि संबंधित सीटों पर हार-जीत की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी।
हर सीट पर वरिष्ठ नेता करेगी तीन-तीन रैलियां
शाह ने हर सीट पर वरिष्ठ नेताओं की हर हाल में कम से कम तीन रैलियां करने का निर्देश भी दिया है। इस क्रम में पार्टी ने कई केंद्रीय मंत्रियों, मुख्यमंत्रियों, राज्य सरकार में मंत्रियों और पदाधिकारियों को चुनाव मैदान में झोंक दिया है।
अतिविशिष्ट सूत्र के मुताबिक बेदी को चेहरा बनाए जाने के शुरुआती दो दिनों तक भाजपा का ग्राफ जरूर बढ़ा था, मगर अब यह ग्राफ ठहर गया है। बेदी की रैलियों में भीड़ न जुटने के कारण चिंतित उम्मीदवार मोदी की रैलियों की मांग कर रहे हैं।
बेदी मामले में वकीलों और व्यापारियों में असमंजस की स्थिति से भी नेतृत्व परेशान है। इस बीच पार्टी नेतृत्व ने बेदी को विवादास्पद मुद्दों पर बयानबाजी से बचने की सलाह दी है। पार्टी नेतृत्व ने देशभर के नेताओं को चुनाव में झोंकने के अलावा केंद्रीय मंत्रियों को केजरीवाल पर हमले की जिम्मेदारी देकर इस आशय का संदेश दिया है।
केजरीवाल के खिलाफ लड़ रही है पूरी बीजेपी
हालांकि, देशभर की फौज उतारने के संदर्भ में केंद्रीय मंत्री राजीव प्रताप रूड़ी ने कहा कि चाहे कोई केंद्रीय मंत्री हो या फिर प्रधानमंत्री ही क्यों न हो। वह पहले भाजपा का कार्यकर्ता है। पार्टी जरूरत के मुताबिक चुनावों में सबकी भूमिका तय करती है।
बेदी को चेहरा बनाए जाने से नाराज संघ कार्यकर्ताओं को मनाने और हालात संभालने के लिए संघ के सहकार्यवाह और भाजपा का प्रभार देख रहे कृष्णगोपाल ने कार्यकर्ताओं से कबड्डी की तरह सांस रोक कर मैदान में उतरने और काम हो जाने के बाद वापस लौटने के लिए कहा है।
पीएम की रैलियों में भीड़ जुटी तो इसकी संख्या बढ़ाई जा सकती है। जरूरत पड़ी तो अंतिम दिन रामलीला मैदान में उनकी बड़ी रैली कराई जा सकती है। इसके अलावा पार्टी अमेरिकी राष्ट्रपति के भारत दौरे को भी भुनाने में जुटी है।