एक बार चांस लेने के चक्कर में खतरनाक ब्लू व्हेल गेम दुनिया भर में तेजी से फैल रहा है। खूफिया मिशन से शुरू होने वाला यह गेम धीरे धीरे 50 दिन के भीतर आत्महत्या तक पहुंच जाता है। कहा जा रहा है कि करीब डेढ़ महीने से ज्यादा इस वक्त में कोई भी बच्चा या युवा गेम के जरिए मिलने वाले मिशन का आदी हो चुका होता है। जिसकी वजह से वह आत्महत्या के मिशन तक पहुंचता है।
चर्चित ब्लू व्हेल को लेकर यह खुलासा एक शोध के बाद किया गया है। देश के सबसे बड़े चिकित्सीय संस्थान एम्स के अलावा जामिया मिलिया इस्लामिया, पांडिचेरी स्थित जेपीएमईआर और ईईडीआरएन के वैज्ञानिकों ने मिलकर यह शोध किया है। जिसके तहत कहा गया है कि अकेलेपन और नकारात्मक सोच रखने वाले बच्चे व युवा ब्लू व्हेल के सबसे ज्यादा शिकार हो रहे हैं।
बता दें कि यह शोध भारत सहित दुनिया भर में ब्लू व्हेल गेम से मरने वालों पर किया गया है। जिसमें उनके परिजनों से पूछताछ के अलावा घटनाओं की समीक्षा भी की गई है।
यहां से हो रही है शुरूआत
Blue Whale Game
- फोटो : File Photo
एम्स के डॉ. आशुतोष कुमार बताते हैं कि ब्लू व्हेल बहुत ही सोचा-समझा खेल है। जिसके हरेक बिंदु बहुत ही सोच-विचार कर तैयार किए गए हैं। आजकल हर दूसरा इंसान स्मार्टफोन रखता है, अक्सर वॉट्सएप के ग्रुप्स पर कई तरह के लिंक आते हैं। जिन पर क्लिक करने से पहले शायद ही कोई सोचता है। इसी मानसिकता को ब्लू व्हेल ने बड़ा हथियार बनाया है।
धीरे-धीरे खुलने लगीं परतें
एक अनुमान के मुताबिक, भारत में ब्लू व्हेल की वजह से 40 से भी ज्यादा बच्चों और युवाओं की मौत हुई है। शोध में इन्हीं से 30 कहानियों को जब समझा गया तो पता चला कि जो बच्चे या युवा अकेलापन या फिर तनाव ग्रस्त हैं। जरा सी बात पर ही वे खुद की जीवन लीला समाप्त करने जैसे ख्याल लाते हैं। डॉ. आशुतोष बताते हैं कि ब्लू व्हेल ऐसे लोगों को बहुत तेजी से अपनी गिरफ्त में ले रहा है।
शोध के दौरान लगने लगा था डर
वैज्ञानिकों ने बताया कि ब्लू व्हेल बच्चों के लिए कितना खतरनाक है? इसका अंदाजा उन्हें शोध के दौरान ही पता चल गया था। जब उनके कमरे में चारों तरफ स्क्रीन पर ब्लू व्हेल गेम चल रहा था। ये भी कहा जाता है कि करीब 24 घंटे तक वैज्ञानिक अपने डर को काबू में नहीं कर पाए थे।
बच्चे नहीं है मास्टर माइंड
The Blue Whale game
एक वैज्ञानिक ने बताया कि शोध के दौरान सबसे चौंकान्ने वाला तथ्य सामने था ब्लू व्हेल का मास्टरमाइंड। कुछ वक्त पहले एक मनोविज्ञान का छात्र पकड़ा गया था। लेकिन यह शोध बताता है कि इस गेम को बनाने में नामचीन मनोवैज्ञानिकों का हाथ हो सकता है।
शोध के बाद निकाले समाधान
इस गेम से बचने के लिए सबसे पहले अकेलापन को दूर करना चाहिए। माता पिता को अपने बच्चों की देखभाल करनी चाहिए। खासतौर पर स्मार्टफोन चलाने वाले बच्चों पर विशेष निगरानी रहनी चाहिए। अगर किसी ग्रुप में कोई लिंक आता है तो बच्चों को उसके बारे में चर्चा करनी चाहिए।
गेम ने बदल दी थी सोच
शोध के मुताबिक, भारत सहित पूरी दुनिया में अब तक जितने भी इस गेम की वजह से मारे गए हैं। इन सबके बीच एक चीज कॉमन थी मनोविज्ञान नीति। गेम के 50 बिंदु इस तरह से तैयार किए गए हैं कि एक बार अगर कोई इसमें घुसता है तो वह घुसता ही चला जाता है। मिशन पूरा करना ही उसके लिए सबकुछ होता है। जितने भी लोग मारे गए, उन सभी में इस तरह की सोच पैदा हो चुकी थी।