केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) से संबद्ध जिले के स्कूल राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की किताबें पढ़ाने से परहेज करते हैं। सभी स्कूलों में पहली से लेकर 12वीं कक्षा तक के लिए निजी प्रकाशकों की किताबें पढ़ाई जाती हैं।
इतना ही नहीं, जो स्कूलों में एनसीईआरटी की किताबें पढ़ाई जाती हैं, वहां भी साइड बुक के नाम पर निजी प्रकाशकों की किताबें पढ़ाई जाती हैं। निजी स्कूलों की मनमानी की वजह से अभिभावकों को मजबूरन किताबें खरीदने के लिए मोटी रकम चुकानी पड़ती है। हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड से संबद्ध स्कूलों का भी यही हाल है।
सीबीएसई की ओर से स्कूलों को एनसीईआरटी की किताबें पढ़ाने का निर्देश दिया गया है। पहली से आठवीं कक्षा तक एनसीईआरटी सिलेबस फॉलो करने की हिदायत है। नौवीं एवं दसवीं में एनसीईआरटी किताब पढ़ाने की शर्त भी है, लेकिन स्कूल इस आदेश पर अमल नहीं होता है।
इन स्कूलों में अच्छे लेखकों और उम्दा दर्जे की पुस्तकें होने के बावजूद एनसीईआरटी की किताबों को नकार दिया जाता है। इसके लिए कुछ स्कूल अपने इंटरनेशनल स्टैंडर्ड का हवाला देते हैं तो कुछ एनसीईआरटी के विषय वस्तु (कंटेंट) को कमतर आंकते हैं, जबकि इसके पीछे मुनाफा का मोटा खेल है।
अमूमन निजी प्रकाशक सत्र शुरू होने के तीन महीने पहले से ही स्कूलों में दस्तक देने लगते हैं। स्कूल में किताब लागू करने के बदले कई तरह के लुभावने वादे किए जाते हैं।
एक स्कूल के अकादमिक कमेटी के सदस्य बताते हैं कि प्रकाशक स्कूल के शिक्षक के लिए कॉपी देकर जाते हैं, समीक्षा करने की बात कहते हैं और किताब लागू करने के बदले हॉली-डे पैकेज, महंगे गिफ्ट, कूपन वगैरह ऑफर करते हैं। कई प्रकाशक तो स्कूलों में किताब लागू करने के बदले जेनसेट, स्मार्ट क्लास रूम भी बनवा देते हैं।