नौकरियों के भरोसे जीने वाले युवाओं की सोच बदल रही है। लीक से हटकर कुछ करने का जुनून ही ऐसे युवाओं को भीड़ से अलग करता है।
50 हजार रुपये उधार लेकर अपनी किस्मत आजमाने वाले सुधीर श्रीवास्तव ने अपना सालाना टर्नओवर करोड़ों में पहुंचा दिया है। आज उनकी हिस्सेदारी अपने कारोबार में लगभग पांच फीसदी है।
युवा उद्यमी सुधीर महेंद्रा, होंडा और मारुति जैसी बड़ी कंपनियों के लिए वायर बनाने का काम करते हैं। इटावा से 1998 में नोएडा पहुंचे माता-पिता दोनों सरकारी नौकरी में थे। इन पर भी सरकारी नौकरी का दबाव था, लेकिन उन्होंने पारिवारिक परंपराओं को तोड़कर अपनी मंजिल खुद बनाने का निर्णय लिया।
लखनऊ से मैकेनिकल इंजीनियरिंग करने के बाद मिंडा और लुमिनेक्स जैसी कंपनियों में तीन साल तक नौकरी की। इसके बाद उन्होंने 50 हजार रुपये उधार लेकर अपना काम शुरू किया। नौकरी छोड़कर 3500 रुपये महीने के किराए पर सेक्टर-10 में एक फैक्ट्री ली। गाड़ियों में लगने वाले एसी के लिए वायर हारनेस का पहला आर्डर मिला।
यहीं से नई शुरुआत हुई और कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। ओनिडा और सीएंडएफ कंपनी के साथ भी लंबे समय तक काम किया। ऑटो कंपोनेंट की दुनिया में धीरे-धीरे जगह बनाई।
इसके अलावा कई ऑटो निर्माता कंपनियों के लिए एक्सेसरीज बनाने का काम भी फैक्ट्रियों में हो रहा है। तीन लोगों से शुरू हुई कंपनी में आज सवा सौ लोग काम कर रहे हैं। कंपनी का टर्नओवर 15 करोड़ से ऊपर पहुंच चुका है।