बत्रा अस्पताल के त्वचारोग विशेषज्ञ डॉ. पूनम भस्ने बताती हैं कि उनके पास हर दिन इस तरह के केस आते हैं। इनमें ज्यादात्तर युवतियां होती हैं। लेकिन कई युवक भी इस तरह की क्रीम के शिकार होते हैं। मुंह पर दाने, खाज, दाद इत्यादि के लिए ये लोग दवा दुकान से क्रीम खरीदकर इस्तेमाल करते हैं और उसका दुष्प्रभाव इन्हें ज्यादा भारी पड़ता है।
कई बार ऐसे केस आते हैं जब घर में किसी एक व्यक्ति को फंगस होता है और देखते-देखते अन्य सदस्यों को भी होने लगता है क्योंकि वह एक-दूसरे के तौलिए, कपड़े और क्रीमें शेयर करते हैं।
सरकार जल्द कर सकती है नियम लागू
एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. रमेश भट्ट ने बताया कि बीते दिनों देश भर के त्वचारोग विशेषज्ञों की ओर से केंद्र सरकार से स्टेरॉयड युक्त क्रीमों को शिड्यूल एच1 की श्रेणी में लाने की मांग की है। ताकि दवा दुकान पर इसे बगैर पर्ची के न बेचा जा सके। उन्होंने उम्मीद जताई है कि इस दिशा में सरकार ने काम करना भी शुरू कर दिया है। वहीं डॉ. मुकेश गिरधर ने बताया कि महाराष्ट्र हाईकोर्ट में याचिका भी दायर की है।
सरकारी अस्पतालों में भी बढ़ी है ओपीडी
दिल्ली सरकार के जीटीबी अस्पताल की डॉ. दीपिका पांदी के अनुसार सरकारी अस्पतालों में भी इस तरह के मरीजों की संख्या काफी बढ़ी है। उन्होंने लोगों को साफ्ट साबुन इस्तेमाल करने की सलाह दी है। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ समय में त्वचा रोग से जूझ रहे लोगों की संख्या कई बढ़ गई है। पहले ओपीडी में केवल 10 प्रतिशत त्वचा रोग के मरीज आते थे लेकिन अब इनकी संख्या बढ़कर 30 से 35 प्रतिशत हो गई है।