पूर्व केंद्रीय मंत्री सुब्रमण्यम स्वामी को राज्यसभा में नामित किए जाने पर भारतीय किसान अभियान ने शुक्रवार को उनका अभिनंदन किया। इस दौरान अभियान के अध्यक्ष व पूर्व सांसद हरपाल पंवार का ज्ञापन पढ़ने और किसानों की समस्या सुनने के बाद सुब्रमण्यम स्वामी ने ऐलान किया कि वह किसानों के मसलों के समाधान के लिए अगले वर्ष अभियान शुरू करेंगे।
इस वर्ष उन्होंने देश से भ्रष्टाचार समाप्त करने के लिए कांग्रेस नेता सोनिया गांधी, राहुल गांधी आदि को जेल भिजवाने का बीड़ा उठा रखा है। ऐसे पांच-छह नेताओं के जेल जाने पर किसी की भी भ्रष्टाचार करने की हिम्मत नहीं होगी।
इस मौके पर सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा कि देश के किसान वर्ष 1857 के विद्रोह में शामिल होने का खामियाजा आज तक भुगत रहे हैं। अंग्रेजों ने किसानों की कमर तोड़ने वाले उगाही जैसे कानून लागू कर दिए थे।
आजादी के बाद भी किसानों की स्थिति में सुधार नहीं हुआ। लाल बहादुर शास्त्री और चौ. चरण सिंह के अलावा किसी भी नेता ने किसानों की ओर ध्यान नहीं दिया। महात्मा गांधी और सरदार पटेल किसानों को लेकर चिंतित थे लेकिन उनकी कुछ समय बाद ही मृत्यु हो गई। उन्होंने कहा कि देश के किसानों को विदेशों की भांति साधन व सुविधा मिलनी चाहिए। इसी तरह उनको उपज का भाव मिले। इसके बाद किसानों को सब्सिडी की जरूरत नहीं होगी।
'चौधरी चरण सिंह मुझे जाट जैसा बताते थे'
सुब्रमण्यम स्वामी
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विदेशों के किसान अपने भारत के किसानों से पांच-छह गुना अधिक कमा रहे है, जबकि उनके देश में पांच-छह माह ही कृषि करने के लिए मौसम होता है। वहीं भारत में तीन मौसम के साथ पूरे वर्ष कृषि करने के अवसर है, मगर सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध नहीं होने पर वह बारिश पर ही निर्भर रहते है।
कार्यक्रम के संयोजक हरपाल पंवार ने सुब्रमण्यम स्वामी से आग्रह किया कि वह किसानों की समस्याओं का समाधान कराने के लिए पहल करे। इसके अलावा इन समस्याओं के जिम्मेदार लोगों के नाम उजागर किए जाए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे पूर्व प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री के बेटे सुनील शास्त्री ने सुब्रमण्यम स्वामी को जय जवान जय किसान का प्रतीक बताया। कार्यक्रम में दिल्ली के पूर्व मंत्री जगदीश मुखी, जाट महासभा के महासचिव चौ. युद्धवीर सिंह और अभियान के नेता यतिंद्र चौधरी ने भी किसानों की समस्याओं पर प्रकाश डाला।
पूर्व केंद्रीय मंत्री सुब्रमण्यम स्वामी ने कार्यक्रम में अधिकांश जाट होने के चलते उनसे और अपने से जुड़ी कई बातें बताई। उन्होंने बताया कि चौ. चरण सिंह मुझे कहते थे कि वे जाटों जैसे है। लगता है कि उनके जन्म के समय अस्पताल में कुछ गड़बड़ी हो गई होगी।
वह गलती से दक्षिण भारत चले गए। इसी बीच उन्होंने जाटों की काबिलियत का बखान करते हुए कहा कि अनपढ़ जाट पढ़े लिखे बराबर और पढ़ा जाट खुदा बराबर कहा जाता है। जाटों के बारे में यह कहावत काफी विख्यात है।