सुल्तानपुर राष्ट्रीय पक्षी उद्यान में आने वाले पर्यटकों के लिए बैटरी वाले वाहनों की व्यवस्था की जाएगी। उद्यान के अंदर चारों ओर स्पेशल ट्रैक बनाया जाएगा। ताकि पर्यटकों को दिक्कत न हो। इस बाबत हरियाणा के खाद्य, आपूर्ति एवं वन राज्यमंत्री कर्णदेव कंबोज ने शुक्रवार को आदेश दिए।
कंबोज ने सुल्तानपुर राष्ट्रीय उद्यान का निरीक्षण किया व मौके पर उपस्थित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान कंबोज ने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि वे पक्षियों की सुविधानुसार झीलों में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करें। उन्होंने सुल्तानपुर राष्ट्रीय उद्यान में इंटरप्रेटेशन सेंटर को भी देखा।
इस सेंटर में पक्षियों की आवाज रिकॉर्ड की गई है, ताकि यहां आने वाले पर्यटकों व स्कूली बच्चों को पक्षियों की आवाज सुनाई जा सके। इस अवसर पर मंडलीय वन्य प्राणी अधिकारी श्याम सुंदर ने बताया कि फिलहाल सुल्तानपुर नेशनल पार्क में पक्षियों की 300 किस्म की प्रजातियां हैं जिनमें से लगभग 70 से 75 प्रजातियां प्रवासी हैं। इसके अलावा करीब 20 से 25 हजार पक्षी और नील गाय, जंगली बिल्ली जैसे अन्य जानवर भी यहां पर रह रहे हैं।
उन्होंने बताया कि यहां विदेशी पक्षी भी मीलों दूरी तय करके आते हैं। साइबेरिया, रूस, अफगानिस्तान, यूरोप व अन्य क्षेत्रों में भारी बर्फबारी के चलते जब वहां जीवन दूभर हो जाता है तो मेहमान परिंदे हमारी मेहमानवाजी का लुत्फ उठाने हमारे यहां आते हैं।
आजकल सुल्तानपुर झील में विदेशी परिंदे पिंनटेल डक, शावलर, यूरेशियन वीजन, रोजी पैलीकॉन, पट्ट शीर्ष राजहंस, भूरी टांग हंस, सामान्य पौचार्ड, टफटड पोचार्ड, लाल कलगी पोचार्ड, सनाईप, करलयू, सुरखाव, वाइट टेल्ड लैपविंग व मार्श हैरीयर आदि निवास कर रहे हैं।
इसके अलावा, देसी परिंदे जैसे सारस क्रेन, पेंडिड स्टार्क, व्हाइट आइबिश, लाल मुनिया, धब्बेदार छाती वाला मुनिया, पिपिट, प्रीनिया रेड स्टार्ट, सामान्य किंगफिशर, पाईड किंगफिशर, धब्बेदार उल्लू, बार्न आऊल, काला तीतर, भूरा तीतर, मैगपाई रौबिन साल भर देखे जा सकते हैं।