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बेटियों के लिये एक मिसाल है रूकसीना, रात को नौकरी व दिन में करती हैं डाक्टर की पढ़ाई

Thu, 25 Aug 2016 11:57 AM IST
यूनुस अलवी/अमर उजाला, गुड़गांव
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- फोटो : अमर उजाला
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रात में नौकरी, दिन में पढ़ाई, पांच नाबालिग भाई-बहनों की परवरिश और बिमार मां की देखभाल और खुद डाक्टर बनकर गरीबों की सेवा करने की आरजू लेकर समाज की परवाह किये बगैर आगे बढ़ रही मेवात के गांव घासेड़ा (गांधी ग्राम घासेड़ा) की बेटी समाज के लिये रूकसीना एक मिसाल है।
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पिता की मौत और मां की बिमारी ने भले ही उसको एमबीबीएस डाक्टर बनने से रोक दिया हो, लेकिन वह बीएएमएस बनकर समाज और अपने परिवार की सेवा करना चहाती है।

27 वर्षीय रूकसीना अभी शादी का इरादा नहीं रखती हैं। लेकिन अपनी दो छोटी बहनों की शादी कर अपना हक अदा करने के लिये वह दिन-रात मेहनत करने में जुटी हुई हैं। साथ ही रूकसीना अपने उस हमदर्द नौजवान बुरहान मोहम्मद को कभी नहीं भूलती। जिसने उसके बुरे वक्त में साथ दिया है।
 

डॉक्टर बन मेवात की सेवा करना चाहती है रूकसीना

मेवात जिला के गांव घासेड़ा कि रहने वाली रूकसीना ने पांचवी कक्षा तक अपनी पढाई गांव के ही स्कूल से की और मेवात मॉडल स्कूल नूंह से उसने दसवीं में 80 और बारवीं में 90 फीसदी अंक हासिंल कर पास की और गुडगांव से उसने मैंथ साईड से अपनी बीए पूरी कर अपने तेवर दिखा दिये थे कि वह एक डाक्टर बनकर मेवात की सेवा करना चहाती है।

एमबीबीएस में दाखिला लेने के लिये रूकसाना ने वर्ष 2013 में एआईएमपीटी की परीक्षा में 1800 वीं रेंक हासिल की। एमबीबीएस की पढाई के लिये रूकसीना को गुजरात जाना था लेकिन पैसों की कमी के कारण उसने अपना मिशन बदल कर एक अध्यापक बनने का सपना संजोया।

लेकिन गांव के लोग और उसके पिता याहया, माता मुमताज उसे डाक्टर बनना देखना चहाते थे। इस वजह से जहां मां ने अपनी बेटी को डाक्टर बनाने के लिये अपने सारे जेवर बैच दिये वहीं गांव के लोगों ने गांव की बेटी को डाक्टर बनाने के लिये काफी मदद की वहीं एक शक्ख्स आसू बुरहान मोहम्मद ने भी उसको काफी आर्थिक मदद कर डाक्टर बनाने के लिये गुजरात भेजने की तैयारी शुरू कर दी थी।

 
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सड़क हादसे में खो दिया पिता

दुर्घटना
अचानक गुजरात जाने से दो दिन पहले रूकसीना के पिता याहया की सडक हादसे में मौत हो गई और मां सदमें कि वजह से सख्त बिमार हो गई। अपनी एमबीबीएस के लिये इक्टटठे किये सारे पैस रूकसीना ने अपनी मां की बिमारी में लगा दिये जिससे उसका डाक्टर बनने का सपना अधूरा रह गया और उसने गुजरात जाने का प्रोग्राम रद्द कर दिया।

रूकसीना ने खासबातचीत में बताया कि पिता कि मौत के बाद वह अकेली पड गई। चार बहन और दो नाबालिक भाईयों कि जिम्मेदारी उसके कंधों पर आ गई क्योंकि घर में कोई कमाने वाला नहीं था।

उसने गुडगांव कॉल सेंटर में रात की सिफ्ट में नौकरी ज्वाईन की, जिससे उसके परिवार का गुजारा चल सके और दिन में अपनी पढाई को जारी रख सके और उसने वर्ष 2014 में एचटीटी की परीक्षा पास कर ली थी।

 
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