बीमारी कभी बताकर नहीं आती और जब आती है तो पीड़ित के साथ ही पूरे परिवार को प्रभावित करती है। बीमारी की वजह से आर्थिक रूप से कमजोर लोगों की समस्याएं बढ़ जाती हैं।
ऐसे में सक्षम लोगों को उनकी मदद के लिए हाथ बढ़ाना चाहिए। यह मानना है होम्योपैथी डॉक्टर अर्चना का। अमर उजाला अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स कार्यक्रम में इनके संघर्षों एवं उद्देश्य के बारे में जाना।
डॉ. अर्चना ने बताया कि उनका जन्म बिहार के एक गांव में हुआ। जहां लड़कियां बहुत ज्यादा आगे नहीं बढ़ पातीं, लेकिन माता-पिता ने हमेशा कोशिश की कि वह पढ़ लिखकर काबिल बनें। पिता हाईस्कूल के प्रधानाचार्य थे जबकि मां ग्रहणी हैं।
गांव में लोगों को होम्योपैथी दवा खाते देखकर इसके बारे में जानने की दिलचस्पी होती थी, क्योंकि यह कम कीमत में मिलती है। यही सोचकर होम्योपैथी डॉक्टर बनने का संकल्प लिया और ज्यादा से ज्यादा लोगों की मदद करने की ठानी।
अर्चना ने हाजीपुर (बिहार) से मेडिकल की पढ़ाई पूरी की। इसके कुछ समय बाद शादी कर पति के साथ नोएडा शिफ्ट हो गईं। उन्होंने बताया कि यहां सोसायटी में काम करने वाली घरेलू सहायिकाओं और गार्ड आदि को देखा तो उनकी मदद की इच्छा हुई।
ऐसे लोगों को मैंने निशुल्क उपचार देना शुरू किया। होम्स-121 स्थित मेरे घर पर किसी भी वक्त दिन में लोग इलाज के लिए आते हैं। इसके साथ ही मैं समय-समय पर निशुल्क शिविर भी लगाती हूं, जिससे ज्यादा से ज्यादा लोगों को मदद मिल सके।