एमसीडी के 126 प्रवेश बिंदुओं पर आरएफआईडी की जगह लागू होगी मल्टी लेन फ्री फ्लो तकनीक, जाम से मिलेगी राहत
छह साल के लिए दिया जाएगा ठेका, शुरुआती छह महीने में नई व्यवस्था लागू करने की जिम्मेदारी कंपनी की
विनोद डबास
नई दिल्ली। दिल्ली के बॉर्डरों पर टोल वसूली के लिए वाहनों को बैरियर पर रुकने की जरूरत नहीं होगी। एमसीडी पथ कर और पर्यावरण प्रतिपूर्ति प्रभार (ईसीसी) वसूलने की मौजूदा रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (आरएफआईडी) व्यवस्था को बैरियर मुक्त मल्टी लेन फ्री फ्लो (एमएलएफएफ) तकनीक से अपग्रेड करने जा रही है। नई व्यवस्था में चलते वाहनों की नंबर प्लेट स्कैन कर उनकी पहचान की जाएगी और लागू शुल्क की वसूली की प्रक्रिया पूरी होगी। इससे दिल्ली में प्रवेश करने वाले व्यावसायिक वाहनों को टोल नाकों पर रुकने से होने वाले जाम से राहत मिलने की उम्मीद है।
एमसीडी ने इसके लिए दिल्ली के सभी 126 पथ कर संग्रहण बिंदुओं पर तकनीकी बदलाव करने का प्रस्ताव तैयार किया है। छह साल के लिए दिए जाने वाले ठेके के तहत चयनित कंपनी को अपने खर्च पर उपकरण लगाने, तकनीकी ढांचा विकसित करने और पूरी व्यवस्था का संचालन एवं रखरखाव करना होगा। कंपनी को शुरुआती छह महीने में नई तकनीक लागू करनी होगी। इसके बाद शेष 54 महीने तक सिस्टम के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी संभालनी होगी।
नंबर प्लेट स्कैन कर होगी वाहनों की पहचान
नई व्यवस्था में ऑटोमेटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (एएनपीआर) और आरएफआईडी तकनीक की मदद से वाहनों की पहचान की जाएगी। एमएलएफएफ तकनीक के तहत वाहन बिना बैरियर पर रुके प्रवेश बिंदु से गुजर सकेंगे। इस दौरान वाहन की पहचान और उसके आवागमन का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होगा। इसके आधार पर लागू पथ कर और ईसीसी के भुगतान की निगरानी की जाएगी। मौजूदा व्यवस्था में शुल्क संग्रह के लिए वाहनों को निर्धारित बिंदुओं पर रुकना पड़ता है, जिससे व्यस्त समय में वाहनों की कतारें लग जाती हैं। नई तकनीक का उद्देश्य इस बाधा को दूर करना है।
बिना भुगतान गुजरने पर डिजिटल नोटिस
नई व्यवस्था में शुल्क नहीं चुकाने वाले वाहनों की पहचान कर बकाया वसूली की कार्रवाई की जा सकेगी। किसी वाहन के प्रवेश का रिकॉर्ड मिलने के बाद यदि उस पर लागू पथ कर या ईसीसी का भुगतान नहीं हुआ है, तो डिजिटल नोटिस जारी करने की व्यवस्था होगी। इससे बिना भुगतान किए गुजरने वाले वाहनों पर नजर रखने और राजस्व के नुकसान को रोकने में मदद मिलने की उम्मीद है।
तकनीकी बदलाव तक जारी रहेगी मौजूदा व्यवस्था
एमसीडी ने स्पष्ट किया है कि शुरुआती छह महीने के तकनीकी बदलाव के दौरान पथ कर और ईसीसी की वसूली मौजूदा आरएफआईडी व्यवस्था के माध्यम से जारी रहेगी। नई प्रणाली को विकसित करने से लेकर उसके संचालन तक की जिम्मेदारी ठेका लेने वाली कंपनी की होगी।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद बदली निविदा
एमसीडी इससे पहले भी पथ कर और ईसीसी संग्रह के लिए ठेकेदार नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू कर चुकी थी। 10 जुलाई 2025 को सदन ने निविदा को स्थायी समिति के माध्यम से मंजूरी मिलने के बाद जारी करने की शर्त के साथ प्रस्ताव वापस भेज दिया था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के बैरियर मुक्त व्यवस्था लागू करने संबंधी निर्देशों को ध्यान में रखते हुए निविदा दस्तावेजों की दोबारा समीक्षा की गई। अब नई तकनीक के आधार पर 126 प्रवेश बिंदुओं पर व्यवस्था को अपग्रेड करने की योजना बनाई गई है।