फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बार काउंसिल आफ इंडिया ने सीजेआई के खिलाफ ‘गढ़े हुए’ आरोपों की निंदा की

Sat, 20 Apr 2019 07:30 PM IST
राजेश सैनी एजेंसी, नई दिल्ली
विज्ञापन
रंजन गोगोई (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

बार काउंसिल आफ इंडिया (बीसीआई) ने शनिवार को प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई के खिलाफ यौन उत्पीड़न के ‘‘गढ़े और झूठे’’ आरोपों की निंदा की और कहा कि बार काउंसिल उनके साथ और ‘‘संस्थान की छवि धूमिल करने’’ के इस प्रयास के खिलाफ खड़ा है।

विज्ञापन


बीसीआई अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने कहा, ‘‘यह सब झूठा और गढ़ा हुआ आरोप है और हम इस तरह के कृत्यों की निंदा करते हैं। ऐसे आरोपों और कृत्यों को प्रोत्साहित नहीं किया जाना चाहिए। यह संस्थान की छवि धूमिल करने का प्रयास है। पूरा बार भारत के प्रधान न्यायाधीश के साथ खड़ा है।’’ 

उन्होंने कहा कि रविवार को शीर्ष बार इकाई की एक आपातकालीन बैठक आहूत की जाएगी और इस संबंध में एक प्रस्ताव पारित किया जाएगा। मिश्रा ने कहा, ‘‘हम प्रस्ताव पारित करेंगे और उसके बाद (बीसीआई के) निर्णय से अवगत कराने के लिए सीजेआई से मुलाकात करने का प्रयास करेंगे।’’ 
विज्ञापन


सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश खन्ना ने कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। वह शनिवार को इस मामले में असाधारण सुनवाई के दौरान मौजूद थे। उन्होंने कहा, ‘‘हम मामले का हिस्सा नहीं हैं...अदालत के समक्ष कोई मामला नहीं है। मैं (विवाद पर) कोई साक्षात्कार नहीं दे रहा।’’ 

हालांकि एससीबीए के पूर्व अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने कहा कि आगे का उचित मार्ग यह होगा कि उच्चतम न्यायालय के कुछ वरिष्ठ न्यायाधीशों द्वारा एक समयबद्ध तरीके से ‘इनहाउस’ जांच करायी ताकि सच क्या है यह पता लग सके। उन्होंने कहा, ‘‘यदि यह झूठा आरोप है तो यह निश्चित तौर पर न्यायपालिका की स्वतंत्रता को एक खतरा है लेकिन यदि यह सच है तो भी यह बहुत गंभीर है।’’ 

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) बार एसोसिएशन ने भी प्रधान न्यायाधीश पर लगे आरोपों की निंदा की और कहा कि यह शीर्ष भारतीय न्यायपालिका को निशाना बनाने का एक प्रयास है और बार उनके समर्थन में खड़ी है। 

एनजीटी बार एसोसिएशन पदाधिकारी गौरव कुमार बंसल ने कहा, ‘‘हम भारतीय न्यायपालिका को निशाना बनाने के इस प्रयास की निंदा करते हैं। इस तरह के आरोपों से निपटने के लिए एक बेहतर रास्ता निकालने की तत्काल जरूरत है। ऐसे आधारहीन आरोप किसी भी न्यायाधीश की प्रतिष्ठा धूमिल करने के लिए पर्याप्त हैं...इस तरह से कोई भी किसी के भी खिलाफ आरोप लगा सकता है।’’ 
विज्ञापन

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई ने अपने खिलाफ लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों को ‘‘अविश्वसनीय’’ बताते हुए शनिवार को उच्चतम न्यायालय में इस मामले की अप्रत्याशित सुनवाई की और कहा कि इसके पीछे एक बड़ी साजिश का हाथ है और वह इन आरोपों का खंडन करने के लिए भी इतना नीचे नहीं गिरेंगे।

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोप सुर्खियों में आने के बाद जल्दबाजी में की गई सुनवाई करते हुए उच्चतम न्यायालय ने इस मामले में संयम बरतने और जिम्मेदारी से काम करने का मुद्दा मीडिया के विवेक पर छोड़ दिया ताकि न्यायपालिका की स्वतंत्रता प्रभावित नहीं हो।

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति अरूण मिश्रा और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की विशेष पीठ ने करीब 30 मिनट तक इस मामले की सुनवाई की।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें